डायरी से अदालत तक पहुंची कोल लेवी की कड़ी, देवेंद्र यादव को ईओडब्ल्यू का नोटिस, इस दिन विशेष अदालत में पेश होने के निर्देश
रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 540 करोड़ रुपए के कोल लेवी मामले की जांच अब भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव तक पहुंच गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने देवेंद्र यादव को नोटिस जारी कर 5 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे रायपुर की विशेष अदालत में पेश होने के लिए कहा है। जांच एजेंसी मामले में अपनी जांच पूरी कर आरोप पत्र पेश करने की तैयारी में है।
इससे पहले सितंबर के अंतिम सप्ताह में ईओडब्ल्यू ने देवेंद्र यादव से रायपुर स्थित कार्यालय में दो घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने कथित तौर पर उन दस्तावेजों और डायरी में दर्ज जानकारी को आधार बनाया, जो कोल लेवी मामले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी जांच के दौरान सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, डायरी में देवेंद्र यादव का नाम और पैसों के लेन-देन से संबंधित विवरण दर्ज होने का दावा किया गया है।
डायरी के पन्नों से खुली लेन-देन की कड़ी
जांच का अहम बिंदु अब यही है कि डायरी में दर्ज रकम और लेन-देन का वास्तविक संबंध क्या था। ईओडब्ल्यू इसी कड़ी को खंगाल रही है। देवेंद्र यादव को मामले में आरोपी बनाए जाने की बात सामने आई है, जबकि यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। मामले की जांच में एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि अवैध तरीके से वसूली गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, चुनावी खर्च और संपत्तियों की खरीद में किया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने भी अपनी जांच में करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध वसूली का उल्लेख किया है और कहा था कि रकम का एक हिस्सा नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचा। ईडी के अनुसार इस मामले में कई संपत्तियों को भी अटैच किया जा चुका है।
15 जुलाई 2020 के आदेश से शुरू हुआ था खेल
जांच एजेंसियों के मुताबिक कोल लेवी की पूरी व्यवस्था की नींव 15 जुलाई 2020 के उस आदेश के बाद पड़ी, जिसमें कोयला परिवहन की ऑनलाइन व्यवस्था में मैन्युअल जांच और जिला खनिज कार्यालय से एनओसी की प्रक्रिया जोड़ी गई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी बदलाव के बाद कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से 25 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली का सिलसिला शुरू हुआ। रायगढ़, कोरबा और सूरजपुर जैसे कोयला उत्पादक जिलों में यह नेटवर्क संचालित होने का आरोप जांच में सामने आया। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूले जाने का उल्लेख जांच और न्यायिक दस्तावेजों में किया गया है।
ऑनलाइन से मैन्युअल व्यवस्था बनी वसूली का जरिया
जांच एजेंसियों के अनुसार पहले कोयला परिवहन से जुड़ी अनुमति की प्रक्रिया ऑनलाइन थी। बदलाव के बाद मैन्युअल एनओसी और अनुमति की जरूरत पड़ने लगी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल कोयला कारोबारियों पर दबाव बनाने के लिए किया गया और प्रति टन तय रकम के अलावा 25 रुपए की अवैध लेवी वसूली गई। जांच में यह भी आरोप है कि जिन कारोबारियों ने कथित लेवी देने से इनकार किया, उनके कोयला परिवहन से जुड़े परमिट और एनओसी को रोकने जैसी कार्रवाई की जाती थी। हाई कोर्ट के विभिन्न आदेशों में भी 15 जुलाई 2020 के आदेश, 25 रुपए प्रति टन की कथित वसूली और करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी से जुड़े जांच एजेंसी के दावों का उल्लेख हुआ है।
ईओडब्ल्यू के आरोप पत्र पर टिकी नजर
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में जनवरी 2024 में अपराध दर्ज किया था। इसके बाद से अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक लोगों समेत कई आरोपियों की भूमिका की जांच की गई। अब देवेंद्र यादव को विशेष अदालत में पेश होने के निर्देश के बाद मामले की अगली कड़ी पर नजर है। 5 अक्टूबर को विशेष अदालत में होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि जांच एजेंसी अपने आरोपों और अब तक जुटाए गए दस्तावेजों को किस रूप में अदालत के सामने रखती है। हालांकि, अंतिम दोष सिद्धि का निर्धारण न्यायालय में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
