Israel-Hezbollah Ceasefire: युद्धविराम के कुछ घंटों बाद ही लेबनान पर इजरायली हमला, 5 लोगों की मौत, क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव
Israel-Lebanon Conflict: इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच हाल ही में लागू हुए युद्धविराम के बावजूद मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। युद्धविराम लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातिह (Nabatieh) क्षेत्र में हवाई और ड्रोन हमले किए, जिनमें कम से कम पांच लोगों की मौत होने की खबर है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है और संघर्ष के दोबारा भड़कने की आशंकाएं बढ़ा दी हैं।
लेबनान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इजरायली लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने नबातिह क्षेत्र के कई स्थानों को निशाना बनाया है। हमलों के कारण कई आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए है, जबकि कुछ इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो गईं है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, तड़के सुबह तक इलाके में गोलाबारी और आर्टिलरी शेलिंग जारी रही, जिससे नागरिकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौरान कम से कम 16 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। राहत एवं बचाव दल अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। नबातिह, हारूफ और कफर सिर जैसे इलाकों में हुई तीव्र बमबारी को हाल के महीनों के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है। वहीं, एक अलग ड्रोन हमले में मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति की भी मौत हो गई है।
अमेरिका, कतर और ईरान की मध्यस्थता से तैयार हुए युद्धविराम समझौते को शुक्रवार शाम 4 बजे से प्रभावी किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में जारी सैन्य टकराव को रोकना और क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को मजबूत करना था।
समझौते में केवल सैन्य कार्रवाई रोकने की बात ही नहीं थी, बल्कि ईरान से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को भी शामिल किया गया था। इनमें ईरान पर लगाए गए कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत, परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण, अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण एजेंसियों के साथ सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, आर्थिक सहयोग को बढ़ाने और बाधित व्यापार मार्गों को फिर से सक्रिय करने पर भी सहमति बनी थी। हालांकि, युद्धविराम के तुरंत बाद हुए इन हमलों ने समझौते की प्रभावशीलता और भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
