Global Energy Crisis: कतर के LNG प्लांट पर हमले से दुनिया में हलचल, भारत-चीन समेत कई देशों की गैस सप्लाई पर खतरा

Global Energy Crisis: कतर के LNG प्लांट पर हमले से दुनिया में हलचल, भारत-चीन समेत कई देशों की गैस सप्लाई पर खतरा

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है। कतर के प्रमुख LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) हब पर हुए मिसाइल हमलों ने न केवल खाड़ी क्षेत्र को झकझोर दिया है, बल्कि भारत, चीन और यूरोप सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

हमलों में रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित गैस प्रोसेसिंग और निर्यात सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। कतर एनर्जी के मुताबिक, इस हमले के कारण देश की कुल LNG निर्यात क्षमता का करीब 17% हिस्सा प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान LNG की ‘ट्रेन 4’ और ‘ट्रेन 6’ यूनिट को हुआ है, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 12.8 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।LNG-(2)-1773982172918

ऊर्जा मामलों के मंत्री और QatarEnergy के CEO साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि हमले से उत्पादन ढांचे को गंभीर क्षति हुई है और इसे पूरी तरह बहाल करने में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। इस स्थिति को देखते हुए कंपनी को कई दीर्घकालिक LNG अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होगी।

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इस संकट का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ने की आशंका है, जो अपनी कुल LNG जरूरत का लगभग 47% कतर से आयात करता है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2024 में करीब 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात किया, जिसमें से 11.30 MMT अकेले कतर से आया था।LNG-1773982133551_v

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विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई में इस बड़े व्यवधान से भारत में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। घरेलू बाजार में कीमतों में उछाल और ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर उद्योग और आम उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा।

यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है। चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देश भी कतर की LNG सप्लाई पर निर्भर हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति, व्यापार और ऊर्जा रणनीतियों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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