होर्मुज में वैश्विक तनाव चरम पर: ट्रंप की नाकेबंदी से भारत के 15 जहाज फंसे, अगले 48 घंटे तय करेंगे ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य

होर्मुज में वैश्विक तनाव चरम पर: ट्रंप की नाकेबंदी से भारत के 15 जहाज फंसे, अगले 48 घंटे तय करेंगे ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच Strait of Hormuz पर अमेरिका की सख्त नाकेबंदी ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने इस अहम समुद्री मार्ग पर निगरानी और नियंत्रण बढ़ा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात पर सीधा असर पड़ा है। इस स्थिति में भारत के कम से कम 15 जहाज फिलहाल इसी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है।

प्रारंभिक आकलन के अनुसार, अमेरिका की यह कार्रवाई मुख्य रूप से ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर केंद्रित है। हालांकि, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों और सैन्य गतिविधियों के कारण गैर-ईरानी मार्गों से आने वाले जहाज भी जोखिम में हैं। भारत के जो जहाज फंसे हैं, वे अधिकतर खाड़ी के अन्य देशों से तेल और गैस लेकर लौट रहे हैं, लेकिन मौजूदा अस्थिरता के कारण उनकी सुरक्षित आवाजाही अनिश्चित बनी हुई है।

रणनीतिक रूप से देखें तो Persian Gulf से होकर गुजरने वाला यह मार्ग भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है। देश के कुल कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है, क्योंकि यह सबसे तेज और किफायती आपूर्ति मार्ग माना जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में भारत ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाकर निर्भरता कम करने की कोशिश की है, फिर भी खाड़ी क्षेत्र का महत्व बरकरार है।

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सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है। भारत पहले ही ईरान के सहयोग से कुछ जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में आगे की रणनीति काफी हद तक अमेरिका की कार्रवाई और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। अगले 24 से 48 घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका असर सिर्फ जहाजों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर भी पड़ेगा। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।

फिलहाल, विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों और मार्गों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील चोकपॉइंट पर किसी भी प्रकार की अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। ऐसे में पूरी नजर अब आने वाले घंटों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि संकट टलेगा या और गहराएगा।

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