घर में खाना बनाने वाली महिलाओं के लिए भी जरूरी है सावधानी, किचन का धुआं बन सकता है सांसों के लिए परेशानी
फेफड़ों के कैंसर का नाम आते ही सबसे पहले धूम्रपान का ख्याल आता है, लेकिन केवल धूम्रपान करने वाले लोगों में ही इसका खतरा हो, ऐसा नहीं है। धूम्रपान से दूर रहने वाले लोगों में भी लंबे समय तक वायु प्रदूषण, सेकेंड हैंड स्मोक और कुछ तरह के धुएं या रसायनों के संपर्क जैसे कारक फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में घर की रसोई में रोजाना कई घंटे खाना बनाने वाली महिलाओं के लिए किचन के धुएं और खराब वेंटिलेशन को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
खाना पकाते समय निकलने वाला धुआं क्यों चिंता का विषय है?
जब तेल को बहुत अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है, खासकर तलने या डीप फ्राई करने के दौरान, तो उससे धुआं और हवा में मौजूद बेहद छोटे कण निकल सकते हैं। बंद या कम वेंटिलेशन वाली रसोई में इनका स्तर बढ़ सकता है। ऐसे प्रदूषकों के लगातार संपर्क में आने से आंखों, गले और सांस की नली में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, यह दावा करना सही नहीं है कि कुकिंग ऑयल का धुआं अकेले फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है। फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कई अलग-अलग कारणों से प्रभावित हो सकता है। इनमें तंबाकू का सेवन, सेकेंड हैंड स्मोक, वायु प्रदूषण, कुछ औद्योगिक या व्यावसायिक पदार्थों का संपर्क और आनुवंशिक कारक शामिल हैं।
रसोई में धुएं से बचने के लिए क्या करें?
रसोई में खाना बनाते समय धुएं को जमा होने देने के बजाय उसे बाहर निकालना सबसे जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- खाना बनाते समय खिड़की या दरवाजा खुला रखें।
- एग्जॉस्ट फैन या किचन चिमनी का इस्तेमाल करें।
- तेल को जरूरत से ज्यादा गर्म न करें।
- तेल से लगातार धुआं निकलने लगे तो आंच कम कर दें।
- डीप फ्राई या तड़का लगाते समय किचन में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
- खराब या बंद एग्जॉस्ट सिस्टम को लंबे समय तक इस्तेमाल न करें।
- रसोई में धुएं और जलने की गंध को लगातार जमा न होने दें।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
लगातार बनी रहने वाली खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, आवाज में बदलाव, बार-बार सांस से जुड़ा संक्रमण, बिना किसी स्पष्ट कारण वजन कम होना या खांसी के साथ खून आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इनमें से कई लक्षण सामान्य संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर कैंसर की आशंका नहीं लगानी चाहिए। लेकिन अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या लगातार बढ़ रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर होता है।
धूम्रपान नहीं करने वालों को भी क्यों रहना चाहिए सतर्क?
धूम्रपान से बचना फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में से एक है, लेकिन इसके अलावा घर के अंदर और बाहर का वायु प्रदूषण तथा लंबे समय तक अलग-अलग प्रकार के धुएं के संपर्क में रहना भी श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रोजाना कई घंटे रसोई में रहने वाली महिलाओं के लिए किचन में पर्याप्त हवा का आवागमन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसका फायदा केवल खाना बनाने वाले व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि घर के अन्य सदस्यों को भी मिल सकता है।
किचन में खाना पकाने के दौरान निकलने वाले धुएं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, लेकिन इसे फेफड़ों के कैंसर का निश्चित या अकेला कारण बताना भी वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। बेहतर वेंटिलेशन, धुएं को बाहर निकालने की उचित व्यवस्था और अत्यधिक गर्म तेल से बचाव श्वसन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी सावधानियां हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किचन के धुएं और फेफड़ों के कैंसर के जोखिम के बीच संबंध कई कारकों पर निर्भर करता है। किसी भी लगातार या गंभीर लक्षण की स्थिति में योग्य डॉक्टर से जांच और सलाह लें।
