भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं गलत और अधूरी जानकारी- हाई कोर्ट, 9 महीने पहले निपट चुके राजस्व प्रकरण को बताया लंबित, रिव्यू में बदला अपना आदेश

भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं गलत और अधूरी जानकारी- हाई कोर्ट, 9 महीने पहले निपट चुके राजस्व प्रकरण को बताया लंबित, रिव्यू में बदला अपना आदेश

बिलासपुर : हाई कोर्ट के सामने किसी प्रकरण की सही स्थिति बताना कितना आवश्यक होता हैं, इसका एक मामला सामने आया है। एक राजस्व प्रकरण को हाई कोर्ट में लंबित बताया गया, जबकि बिलासपुर संभाग के कमिश्नर करीब नौ महीने पहले ही उस मामले का निराकरण कर चुके थे। हाई कोर्ट ने जब इस तथ्य को रिकॉर्ड पर देखा तो राज्य शासन की रिव्यू याचिका मंजूर करते हुए अपने पहले के आदेश में संशोधन कर दिया।

30 दिन में फैसला करने का था आदेश

मामले में हाई कोर्ट ने 6 मई 2026 को सुनवाई करते हुए बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को संबंधित राजस्व अपील का 30 दिन के भीतर, यथासंभव जल्द निराकरण करने का निर्देश दिया था। आदेश के बाद जब प्रकरण की स्थिति सामने आई तो पता चला कि कमिश्नर 6 अगस्त 2025 को ही इस मामले में फैसला सुना चुके थे। यानी हाई कोर्ट का आदेश आने से करीब नौ महीने पहले ही राजस्व प्रकरण का अंतिम निर्णय हो चुका था।

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रिकॉर्ड में दर्ज था कमिश्नर का आदेश

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राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता सब्यसाची चौबे ने कोर्ट को बताया कि कमिश्नर का 6 अगस्त 2025 का आदेश ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज था। लेकिन 6 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य हाई कोर्ट के संज्ञान में नहीं लाया गया। इसी वजह से कोर्ट ने प्रकरण को लंबित मान लिया और कमिश्नर को दोबारा निर्णय लेने का निर्देश जारी कर दिया। राज्य शासन ने रिव्यू याचिका दायर कर कहा कि महत्वपूर्ण तथ्य छिप जाने के कारण कोर्ट के सामने प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। जिस मामले के निराकरण का निर्देश दिया गया, उस पर पहले ही फैसला हो चुका था।

हटाए गए पुराने आदेश के तीन पैराग्राफ

मामले की सुनवाई जस्टिस ए के श्रीवास्तव की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने 6 अगस्त 2025 को कमिश्नर, बिलासपुर संभाग द्वारा पारित आदेश का अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि यह तथ्य 6 मई 2026 को आदेश पारित करते समय उसके संज्ञान में नहीं था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य की रिव्यू याचिका स्वीकार करते हुए 6 मई 2026 के आदेश में संशोधन कर दिया। पुराने आदेश के पैराग्राफ 8, 9 और 10 को हटा दिया गया।

कमिश्नर के फैसले को चुनौती देने की छूट

हालांकि हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित पक्ष कमिश्नर द्वारा 6 अगस्त 2025 को पारित आदेश को चुनौती दे सकते हैं। यदि किसी पक्ष को उस आदेश पर आपत्ति है तो वह कानून के तहत उचित उपाय अपना सकता है।

कोर्ट ने दी अधिवक्ताओं को नसीहत

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अधिवक्ताओं और पक्षकारों को भी महत्वपूर्ण हिदायत दी। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को मामले के वास्तविक तथ्यों के प्रति पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए। कोर्ट के समक्ष दिया गया कोई भी बयान तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गलत या अधूरी जानकारी के कारण संबंधित प्राधिकारी के सामने भी अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में मुकदमे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के सामने सही तरीके से रखना जरूरी है।

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