कोरोना के बाद भी PPE किट की सप्लाई जारी, जरूरी दवाओं का इंतजार! छत्तीसगढ़ में मेडिकल सप्लाई सिस्टम पर उठे सवाल

कोरोना के बाद भी PPE किट की सप्लाई जारी, जरूरी दवाओं का इंतजार! छत्तीसगढ़ में मेडिकल सप्लाई सिस्टम पर उठे सवाल

CGMSC PPE Kit Supply Controversy: कोरोना महामारी के दौर में इस्तेमाल होने वाली PPE किट की सप्लाई को लेकर छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर अस्पतालों में बड़ी संख्या में PPE किट जमा होने और अनुपयोगी दवाओं की सप्लाई के दावे सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर मल्टीविटामिन और कैल्शियम जैसी जरूरी दवाओं की कमी की बात कही जा रही है। रायपुर के आसपास स्थित सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल में सप्लाई व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। यदि ये दावे जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी संसाधनों के उपयोग और दवा प्रबंधन से जुड़ा अहम मामला हो सकता है।

माना सिविल अस्पताल में PPE किट के कार्टून, अतिरिक्त सप्लाई लेने से इनकार
रायपुर के माना सिविल अस्पताल के स्टोर रूम में बड़ी संख्या में PPE किट रखे होने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल स्टाफ के मुताबिक, यहां पहले ही 1,000 से अधिक PPE किट भेजी जा चुकी थीं। इसके बावजूद कुछ दिन पहले 500 अतिरिक्त किट भेजे जाने की बात कही गई। बताया गया कि अस्पताल ने अतिरिक्त खेप लेने से इनकार कर दिया।

पड़ताल के दौरान माना बस्ती के स्वास्थ्य केंद्र और ऊपरवारा स्थित आयुष्मान केंद्र में भी PPE किट के कार्टून रखे होने की जानकारी मिली। इन केंद्रों पर हाल ही में चार-चार कार्टून किट भेजे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मौजूदा जरूरत का आकलन किए बिना इतनी बड़ी मात्रा में मेडिकल सामग्री क्यों भेजी जा रही है ?

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980 रुपये की एक PPE किट, स्टोर में रखे-रखे खराब होने का खतरा
ऊपरवारा आयुष्मान केंद्र में भेजी गई PPE किट की प्रति नग कीमत 980 रुपये दर्ज होने की जानकारी दी गई है। माना बस्ती के आयुष्मान केंद्र में भी चार कार्टून PPE किट भेजे जाने की बात सामने आई है। माना सिविल अस्पताल के स्टोर रूम में रखी कुछ किटों को चूहों द्वारा कुतरे जाने, पैकेट फटने और कुछ पैकेट खुले होने की बात भी सामने आई है। यदि बड़ी मात्रा में खरीदी गई मेडिकल सामग्री इस्तेमाल होने के बजाय स्टोर में ही खराब होती है, तो इससे सरकारी धन के उपयोग और सप्लाई की जरूरत के आकलन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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जरूरी दवाओं की कमी, दूसरी ओर अनुपयोगी दवाओं की सप्लाई
पड़ताल में यह भी दावा किया गया है कि कुछ सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसी दवाएं भेजी गईं, जिनकी तत्काल जरूरत नहीं थी या जिनकी एक्सपायरी नजदीक थी। इसके उलट मल्टीविटामिन और कैल्शियम जैसी जरूरी दवाओं की आपूर्ति लंबे समय से प्रभावित होने की बात कही गई है। बताया गया है कि इन दवाओं की मांग पहले ही भेजी जा चुकी थी।

इस स्थिति ने दवा वितरण की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पतालों को जिन दवाओं की जरूरत है, उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के बजाय यदि कम उपयोग होने वाली या जल्द एक्सपायर होने वाली दवाएं भेजी जा रही हैं, तो इससे स्टोरेज और सरकारी खर्च दोनों पर असर पड़ सकता है।

जुलाई में पहुंचे इंजेक्शन, अगस्त में हो गई एक्सपायरी
अभनपुर ब्लॉक के एक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की सप्लाई को लेकर भी गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, जुलाई के अंतिम सप्ताह में जेंटामाइसिन और मैग्निशियम सल्फेट समेत कुछ इंजेक्शन की 2,000 से अधिक यूनिट भेजी गईं, जिनकी एक्सपायरी अगस्त में थी।

बताया गया है कि उपयोग नहीं होने के कारण ये इंजेक्शन एक्सपायर हो गए। अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाएं भेजे जाने के दावे किए गए हैं। इससे सवाल उठता है कि दवाओं की एक्सपायरी डेट और अस्पतालों की वास्तविक जरूरत का आकलन सप्लाई से पहले किस स्तर पर किया जा रहा है।

CGMSC की सप्लाई व्यवस्था पर उठे सवाल
पूरे मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की सप्लाई व्यवस्था और कथित पुश मैकेनिज्म पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर PPE किट और कम उपयोग वाली दवाओं के स्टॉक जमा होने की बात सामने आई है, तो दूसरी ओर जरूरी दवाओं की कमी के दावे किए जा रहे हैं।

यदि अस्पतालों में बिना मांग या जरूरत के मेडिकल सामग्री भेजी जा रही है और वह इस्तेमाल से पहले ही एक्सपायर या खराब हो रही है, तो सप्लाई प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी हो जाती है। हालांकि, कथित अनियमितताओं, वित्तीय नुकसान और सप्लाई संबंधी निर्णयों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अहम होगा।

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