भिलाई: DSP को फर्जी केस में फंसाने का दांव उल्टा पड़ा, कंपनी के 3 आला अफसरों पर FIR, स्कॉर्पियो-N से भड़का था विवाद
रायपुर। भिलाई शहर के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) को कथित तौर पर झूठे मुकदमे में उलझाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भ्रामक शिकायतें कर पुलिस अधिकारी को फंसाने की कोशिश एस-स्क्वायर आयरोमैक्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों पर भारी पड़ गई। सुपेला थाना पुलिस ने अदालत के आदेश के बाद हरकत में आते हुए कंपनी के तीन लोगो के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने जिन लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, उनमें कंपनी के अधिकृत अधिकारी सतनाम सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर विभूति भूषण बाबू और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीराम गुप्ता के नाम शामिल हैं। पुलिस अब इस बात की तह तक जाने में लगी है कि आखिर किन कारणों से अफसर पर बेबुनियाद आरोप मढ़े गए।
स्कॉर्पियो-N बनी बवाल की जड़
पूरे विवाद की नींव स्कॉर्पियो-N वाहन (क्रमांक CG 05/AP 5000) के इर्द-गिर्द घूमती है। बताया जा रहा है कि गाड़ी को लेकर ही कंपनी के लोगों ने पुलिस महकमे के दरवाजे खटखटाए थे। शुरुआत में मामला सामान्य लेनदेन या विवाद का बताया गया, लेकिन शिकायत के पन्नों में जो आरोप गढ़े गए, वे पुलिस अधिकारी को लपेटने वाले थे। आरोप है कि अफसर को कठघरे में खड़ा करने के लिए तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया और पुलिस महकमे के सामने भ्रामक जानकारी परोसी गई।
कोर्ट के दखल के बाद पुलिस हुई सख्त
जब अफसर के खिलाफ बुने गए जाल की भनक लगी, तो मामला न्यायालय की चौखट तक जा पहुंचा। अदालत ने पूरे प्रकरण और पेश किए गए दस्तावेजों पर बारीकी से गौर किया। अदालत का फरमान मिलते ही सुपेला पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया। अब थाना स्तर पर दस्तावेजों की छंटनी शुरू हो गई है।
कागजातों की हो रही पड़ताल, दर्ज होंगे बयान
सुपेला पुलिस अब उन तमाम रिकॉर्ड को खंगाल रही है, जो विवाद की परतें खोल सकते हैं। पुलिस गाड़ी के असली कागजात और पूर्व में पुलिस महकमे को दी गई शिकायतों की कॉपियां जुटा रही है। जांच की सुई इस दिशा में भी घूम रही है कि क्या जानबूझकर, किसी सोची-समझी साजिश के तहत अफसर की छवि धूमिल करने और उन्हें फंसाने का ताना-बाना बुना गया।
थाने से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस आने वाले समय में दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर या अलग-अलग उनके बयान ले सकती है। जांच टीम यह भी देखेगी कि आखिर वे कौन सी परिस्थितियां थीं, जिनके चलते ऐसी भ्रामक शिकायतें तैयार की गईं और उन आरोपों का असली आधार क्या था। दस्तावेजों की जांच और पूछताछ के बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
