विदेश तक फैला कथित तांत्रिक का नेटवर्क: जांच में पांचों कंपनियां जाली मिलीं, 300 करोड़ नकद की तलाश में जुटीं एजेंसियां
रायपुर | पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान रसूखदार रहे कथित तांत्रिक कृष्ण कुमार उर्फ केके श्रीवास्तव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि इस आरोपी द्वारा बनाई गई सभी पांच कंपनियां केवल कागजों तक ही सीमित थीं। जांच एजेंसी की टीम जब दस्तावेजों में दर्ज पतों की तस्दीक करने पहुंची, तो वहां किसी भी कंपनी का कोई वजूद नहीं मिला। इन कंपनियों को खोलने के लिए लगाए गए कागज भी पूरी तरह से फर्जी पाए गए हैं। इसके अलावा कंपनियों के बैंक खातों का लेन-देन भी संदिग्ध मिला है।
ईडी ने 30 जुलाई को केके श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह 7 अगस्त तक रिमांड पर है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पूछताछ में अधिकारियों को सहयोग नहीं कर रहा है। वह इस बात का जवाब देने से बच रहा है कि धोखाधड़ी की रकम उसके बैंक खातों तक किस रास्ते से पहुंची।
मामला जून 2023 का है, जब उसने रावत एसोसिएट्स के मालिक को स्मार्ट सिटी योजना के तहत 500 करोड़ रुपए का ठेका दिलाने का झांसा दिया था। इस एवज में उसने 15 करोड़ रुपए की ठगी की थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद उसने 3.40 करोड़ रुपए रावत कंपनी को वापस भी किए थे। पीड़ित को बाकी 11.60 करोड़ रुपए लौटाने का वादा किया गया था, जिसका अब तक भुगतान नहीं हुआ है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि जो 3.40 करोड़ रुपए लौटाए गए, वे पैसे कहां से आए थे।
पैसों के लेन-देन को लेकर दस्तावेजों में कई चौंकाने वाली जानकारियां दर्ज हैं। केके ने अपनी अवैध कमाई को दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर जैसे देशों में ट्रांसफर किया। इसके लिए उसने इन देशों में माल-भाड़ा और कंटेनर लीजिंग के नाम पर काल्पनिक कंपनियों का ताना-बाना बुना। इसके बाद उन्हीं विदेशी खातों से पैसा वापस छत्तीसगढ़ में खोली गई उसकी जाली कंपनियों में लाया गया। जांच टीम ने इन सभी संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल हासिल कर ली है।
बिलासपुर रोड पर केके श्रीवास्तव का एक बड़ा आश्रम स्थित है। एसीबी-ईओडब्ल्यू और ईडी को भनक लगी है कि उसके पास लगभग 300 करोड़ रुपए नकद हो सकते हैं। अंदेशा है कि यह पैसा देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी छिपाकर रखा गया है। हालांकि, जांच एजेंसियों को अभी तक इसके पक्के सबूत नहीं मिले हैं और तलाश जारी है।
इसके साथ ही फरारी के दिनों में तांत्रिक के रहन-सहन का भी खुलासा हुआ है। भागने के दौरान वह लगातार अपनी लोकेशन और मोबाइल फोन बदलता रहता था। हर दो-तीन दिन में नया एप्पल फोन इस्तेमाल करता था। वह कभी सामान्य लॉज और धर्मशालाओं में ठहरता, तो कभी फाइव स्टार होटलों में। नेपाल में फरारी काटने के दौरान भी उसने खूब पैसे खर्च किए। अब अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि फरारी के दौरान हो रहे इस खर्च का स्रोत क्या था।
