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रायपुर में सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर: 39 लाख की ठगी, कैंसर पीड़ित पिता के इलाज के पैसे डकारे; CM-DGP से गुहार के बाद भी 'खाकी' मौन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। नेशनल जगत विजन की इस विशेष क्राइम रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसी दास्तां बताने जा रहे हैं, जहां एक पीड़ित न्याय के लिए पिछले 135 दिनों से दर-दर भटक रहा है। 39 लाख रुपये की भारी-भरकम ठगी का शिकार हुए एक कारोबारी को अब उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से गुंडे बुलाकर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री, डीजीपी (DGP) और रायपुर एसपी (SP) तक शिकायत पहुंचने के बावजूद मौदहापारा थाने की पुलिस अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई है। उल्टा, खाकी वर्दी वाले पीड़ित पर ही समझौते का दबाव बना रहे हैं।
धोखे की बुनियाद: भरोसे का फायदा उठाकर ठगे 39 लाख
जानकारी के अनुसार, पीड़ित मोहम्मद शाहनवाज की गुरुनानक चौक पर फर्नीचर की दुकान है। आरोपी मोहम्मद इमरान नवाब का इस दुकान पर अक्सर आना-जाना था। इसी जान-पहचान और विश्वास का फायदा उठाते हुए इमरान ने अपनी एक कमर्शियल मशीन (रजिस्ट्रेशन नंबर GD320-LS-32T) शाहनवाज को बेचने का सौदा किया। यह पूरा सौदा 39 लाख रुपए में तय हुआ।
शाहनवाज ने बैंक खाते और नकद के माध्यम से इमरान को पूरी रकम का भुगतान कर दिया। पैसे मिलने के बाद इमरान की नीयत बदल गई। उसने पहले बहाना बनाया कि मशीन शहर से बाहर है और आते ही दे दी जाएगी। जब कई दिनों तक मशीन नहीं मिली, तो शाहनवाज ने अपने स्तर पर छानबीन की। तब यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि इमरान ने वह मशीन बिना बताए चुपके से किसी और को बेच दी है।
कैंसर पीड़ित पिता के पैसे डकारे, 18 चेक हुए बाउंस
जब शाहनवाज ने ठगी की शिकायत पुलिस में करने की चेतावनी दी, तो आरोपी इमरान ने बचने के लिए 3 अप्रैल 2024 को कोर्ट में दो गवाहों की मौजूदगी में एक एग्रीमेंट किया और पैसे लौटाने के एवज में 8 चेक थमा दिए। लेकिन, वह कभी घरेलू परेशानी तो कभी धमतरी में पत्नी का मकान बिकने का बहाना बनाकर चेक बैंक में लगाने से रोकता रहा। बाद में उसने एक नया इकरारनामा कर 10 और चेक दिए, लेकिन बैंक में लगाते ही सभी चेक बाउंस हो गए।
इस धोखाधड़ी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पीड़ित शाहनवाज के पिता कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। परिवार को उनके इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। इस ठगी ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है।
आजमगढ़ के गुंडों की धमकी पुलिस से दोस्ती की धौंस
पैसे वापस करने के बजाय अब आरोपी इमरान खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आया है। वह खुलेआम धमकियां दे रहा है कि यूपी के आजमगढ़ से गुंडे बुलवाकर हत्या करवा देगा और सारे एग्रीमेंट और चेक फाड़कर फेंक देगा, ताकि कोई सबूत ही न बचे।
पीड़ित का आरोप है कि घटना को 135 दिन बीत जाने के बाद भी अपराधी खुलेआम क्रिकेट खेल रहा है और पार्टियां कर रहा है। वह पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों— CSP राजेश देवांगन और ASP परवेज अहमद कुरैशी— से अपने संबंधों की लगातार धौंस दे रहा है। उसका दावा था कि उसके खिलाफ कहीं एफआईआर नहीं होगी, जो आज सच साबित होता दिख रहा है।
सिस्टम बेबस या खाकी की मिलीभगत?
39 लाख की पक्की ठगी, बाउंस चेक, कोर्ट के एग्रीमेंट और जान से मारने की धमकियों के पुख्ता सबूत होने के बावजूद मौदहापारा पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। अपराध दर्ज कर गिरफ्तारी करने और कड़ी कार्रवाई करने के बजाय पुलिस वाले पीड़ित पर ही समझौते के लिए अनुचित दबाव बना रहे हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
