अस्थाई गौठान में 48 घंटे में 31 से अधिक मवेशियों की मौत, कीचड़ में दम तोड़ते रहे बेजुबान
बिलासपुर : मस्तूरी ब्लॉक की सीपत तहसील अंतर्गत ग्राम झलमला में खेतों की फसल बचाने के लिए बनाए गए अस्थाई गौठान में मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि महज 48 घंटे के भीतर 31 से अधिक मवेशियों की जान चली गई। आरोप है कि गौठान में चारा-पानी की कमी, कीचड़ और बारिश से बचाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशियों की यह दुर्दशा हुई। घटना के बाद से गांव में आक्रोश है और गौठान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार को 23 और रविवार को 8 मवेशियों की मौत हुई। उनका कहना है कि गौठान में मवेशियों को इस कदर ठूंसकर रखा गया था कि उनके खड़े होने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। बारिश के चलते पूरा परिसर कीचड़ से भर गया था। न चारे का पर्याप्त इंतजाम था और न ही पीने के लिए साफ पानी। ऐसे में कमजोर और बीमार मवेशी कीचड़ में गिरने के बाद उठ नहीं सके और उनकी मौत हो गई।
फसल बचाने की कवायद में चढ़ी बेजुबानों की बलि
ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए अस्थाई गौठान बनाया गया था। इसमें बड़ी संख्या में मवेशियों को रखा गया, लेकिन उनकी देखभाल और सुरक्षा के इंतजाम भारी कमी रही। गौठान में न तो बारिश से बचाने के लिए टीन शेड था और न ही जमीन पर सूखी जगह। लगातार बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि मवेशियों को खाने के लिए सूखा पैरा तक उपलब्ध नहीं कराया गया। पानी और चारे की व्यवस्था नहीं होने के साथ ही सीमित जगह ने हालात को और गंभीर बना दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाता और उनके लिए पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था की जाती, तो कई जानें बचाई जा सकती थी।
मौतों के आंकड़े पर कर रहे अलग-अलग दावे
मवेशियों की मौत को लेकर ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। ग्रामीण जहां 31 से अधिक मवेशियों की मौत की बात कह रहे हैं, वहीं सरपंच ने इस आंकड़े को खारिज करते हुए शनिवार को 6 और रविवार को 8, कुल 14 मवेशियों की मौत स्वीकार की है। सरपंच का कहना है कि गौठान में चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी और मवेशियों की मौत अत्यधिक बारिश के कारण हुई। उन्होंने यह भी कहा कि अस्थाई गौठान का संचालन पंचायत नहीं, बल्कि स्थानीय किसान कर रहे थे। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब बड़ी संख्या में मवेशियों को एक जगह रखा गया था, तो उनकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि व्यवस्था पर्याप्त थी, तो इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत कैसे हो गई?
मौत का मंजर छिपाने की कोशिश, जेसीबी से दफनाए गए शव
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना सामने आने के बाद मृत मवेशियों को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। उनका कहना है कि मौतों की वास्तविक संख्या और कारणों का पता लगाने के बजाय मामले को जल्द निपटाने की कोशिश की गई। मवेशियों को दफनाए जाने के बाद घटना की वास्तविक स्थिति सामने लाने और मौतों की संख्या की पुष्टि की सही जानकारी नहीं दी जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले में जिम्मेदार लोग अपनी जवाबदेही से बचने में लगे हैं।
ग्रामीणों ने उठाई जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि गौठान में मवेशियों को रखने से पहले उनके चारे, पानी, सुरक्षा और बारिश से बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। यदि लापरवाही हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों और सरपंच के दावों के बीच मौतों की वास्तविक संख्या और कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में पशु चिकित्सा विभाग और प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि मवेशियों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इस मामले में किसकी जिम्मेदारी बनती है।
