जल संसाधन विभाग में 5576 करोड़ का महाघोटाला: रात के अंधेरे में अपात्र कंपनियों को बांटे गए टेंडर; ईएनसी समेत 14 अफसर राडार पर
टेंडर घोटाला • करोड़ों का काम छिपाकर सेट की गई बिड कैपेसिटी, पूर्व विधायक ने पीएमओ-ईओडब्ल्यू को सौंपे दस्तावेज
रायपुर । छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में 5 हजार 576 करोड़ रुपए के टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। विभागीय अधिकारियों ने निविदा शर्तों को ताक पर रखकर अपात्र ठेकेदारों को रातों-रात पात्र बनाते हुए 27 जुलाई 2026 की रात गुपचुप तरीके से टेंडर खोल दिए। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मुख्य सचिव और विभागीय सचिव को सैकड़ों पन्नों के दस्तावेजी साक्ष्य सौंपकर इस पूरे नेक्सस की परतें उधेड़ दी हैं। सिकासर-कोडार, मोहमेला-सिरपुर और मटनार-देवरगांव बैराज के टेंडरों में बिड कैपेसिटी (बोली क्षमता) छिपाने और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने के गंभीर साक्ष्य सामने आए हैं। शिकायत के बाद मंत्रालय में हड़कंप मचा हुआ है और 14 वरिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की तलवार लटक गई है।
मटनार-देवरगांव बैराज: 14 हजार करोड़ का काम छिपाकर अपात्र कंपनी बनी एल-2
जगदलपुर स्थित मटनार-देवरगांव बैराज का निर्माण 1636 करोड़ रुपए की लागत से होना है। दस्तावेजों के अनुसार, इस टेंडर में एल-1 (सबसे कम बोली लगाने वाली) कंपनी एनसीसी लिमिटेड बनी, जिसके पास टेंडर की निर्धारित भौतिक क्षमता ही नहीं थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने उसे पात्र मान लिया। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा एल-2 कंपनी रित्विक प्रोजेक्ट्स ने किया। कंपनी को अरुणाचल प्रदेश में 14 हजार 445 करोड़ रुपए का दिबांग प्रोजेक्ट मिला हुआ है, जिसे टेंडर भरते समय जानबूझकर छिपाया गया। ठेकेदार ने अपनी बिड कैपेसिटी 4294 करोड़ रुपए दर्शाई थी, जबकि 14 हजार करोड़ के छिपे हुए काम को जोड़ने पर ठेकेदार की वास्तविक बिड कैपेसिटी माइनस (-) 10,151 करोड़ रुपए हो जाती है। इस तकनीकी अयोग्यता और सिंगल टेंडर बचने के बावजूद विभागीय अफसरों ने 27 जुलाई 2026 की रात गुपचुप तरीके से निविदा मंजूर कर ली।
सिकासर-कोडार लिंक: मप्र जल निगम की चिट्ठी ने खोली दिलीप बिल्डकॉन की पोल
गरियाबंद कैनाल पर 2549 करोड़ रुपए की लागत वाले सिकासर-कोडार लिंक प्रोजेक्ट में एल-1 दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को घोषित किया गया। टेंडर की अनिवार्य शर्त थी कि ठेकेदार के पास 1274 करोड़ रुपए के 'सिमिलर नेचर' वाले कार्य का स्वतंत्र अनुभव होना चाहिए। कंपनी ने शुरुआत में गलत अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर पात्रता हासिल कर ली। लेकिन 1 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश जल निगम द्वारा जारी संशोधित प्रमाण पत्र ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। नए पत्र के मुताबिक, गांधी सागर-2 योजना के जॉइंट वेंचर में दिलीप बिल्डकॉन का हिस्सा 1302 करोड़ के काम में केवल 65 प्रतिशत था। इस हिसाब से कंपनी का अनुभव सिर्फ 846 करोड़ रुपए बैठता है, जो मांगी गई योग्यता से 428 करोड़ रुपए कम है। इसके बावजूद अधिकारियों ने आंखें मूंदकर ठेका थमा दिया।
मोहमेला-सिरपुर बैराज: 'वर्क इन हैंड' छिपाकर हासिल किया टेंडर
रायपुर के समीप आरंग में 574 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले मोहमेला सिरपुर बैराज में भी यही प्रक्रिया दोहराई गई। यहां एल-1 ओम मेटल्स ने अपना 'वर्क इन हैंड' (हाथ में मौजूद काम) छिपाकर अपनी बिड कैपेसिटी कृत्रिम रूप से सेट की। वहीं एल-2 दिलीप बिल्डकॉन के वित्तीय दस्तावेज भी ऑडिट में त्रुटिपूर्ण और असंगत पाए गए। दोनों अपात्र कंपनियों को सिस्टम ने मिलीभगत कर पात्र ठहरा दिया।
इनकमिंग जांच: कटघरे में जल संसाधन विभाग के 14 अफसर पूर्व विधायक कमरो ने इस पूरे सिंडिकेट में शामिल 14 अफसरों की सूची सौंपी है:
- प्रमुख अभियंता: जितेन्द्र नेताम पर आरोप है कि उन्होंने नई नोटशीट चलवाकर अपात्र कंपनियों को सीधे पात्र घोषित करवाया।
- मुख्यालय की भूमिका: मुख्य अभियंता (निविदा) आबताब आलम, ईई संजय गुप्ता, अरविन्द कोसले, अनन्या गुप्ता और ओएसडी मक्सी कुजूर पर फर्जी दस्तावेजों में हेरफेर कर नोटशीट आगे बढ़ाने और मंजूरी देने का आरोप है।
- सिकासर-कोडार मामला: गरियाबंद के एसई आई.ए. सिद्दीकी और ईई एस.के. बर्मन पर मिलीभगत का आरोप।
- मटनार और मोहमेला मामला: जगदलपुर के सीई एलेक्जेंडर ग्राहम, एसई नरेन्द्र कुमार पाण्डेय, ईई वेद प्रकाश पाण्डेय तथा रायपुर के सीई सुमन कुमार मिंज, एसई संतोष साहू, ईई ललित राउते की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
ब्लैकलिस्टिंग की मांग, EOW और ACB के पास पहुंचे दस्तावेज
शिकायतकर्ता ने तीनों टेंडरों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और असत्य जानकारी देकर शासन को गुमराह करने वाली फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। मामले की विस्तृत शिकायत और 500 से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव (सीएम सचिवालय), आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को भेज दिए गए हैं।
