छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: CBI का बड़ा एक्शन, 38 लाख से सीधे करोड़ों में पहुंची पूर्व आबकारी विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी की संपत्ति

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: CBI का बड़ा एक्शन, 38 लाख से सीधे करोड़ों में पहुंची पूर्व आबकारी विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी की संपत्ति

रायपुर:छत्तीसगढ़ के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला देने वाले बहुचर्चित 3,200 करोड़ रुपए के महा-शराब घोटाले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का एक्शन तेज हो गया है। इस संगठित भ्रष्टाचार के प्रमुख किरदारों में से एक, पूर्व आबकारी विशेष सचिव और CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के एमडी रहे अरुणपति त्रिपाठी पर जांच एजेंसी ने अपना शिकंजा कस दिया है। सीबीआई ने त्रिपाठी और उनकी पत्नी मंजुला त्रिपाठी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का नया और कड़ा मामला दर्ज किया है। जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे हैरत में डालने के लिए काफी हैं। महज एक दशक के भीतर एक सरकारी अफसर की संपत्ति छलांग मारते हुए 38 लाख से सीधे करोड़ों के आंकड़े को पार कर गई।

38 लाख से 3.32 करोड़ तक का 'जादुई' सफर

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के दस्तावेजों के मुताबिक, साल 2013 में जब अरुणपति त्रिपाठी ने अपनी संपत्ति का आधिकारिक ब्यौरा दिया था, तब उनके पास कुल 38 लाख 8 हजार रुपए की संपत्ति थी। लेकिन इसके बाद जैसे उनके हाथ कोई 'कुबेर का खजाना' लग गया हो। साल 2023 तक आते-आते, जब वे इस प्रदेश के शराब सिंडिकेट के सबसे रसूखदार और ताकतवर खिलाड़ियों में गिने जाने लगे, उनकी घोषित संपत्ति बढ़कर 3 करोड़ 32 लाख रुपए हो गई।

सीबीआई की गहन जांच में यह तथ्य भी प्रमुखता से उजागर हुआ है कि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मंजुला ने अपनी वैध आय के ज्ञात स्रोतों से करीब **4 करोड़ 91 लाख रुपए** ज्यादा की संपत्ति जुटाई है। इस बेहिसाब काली कमाई को रियल एस्टेट और लग्जरी संपत्तियों में खपाया गया।

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कहां-कहां किया गया भारी निवेश?

  •  राजधानी रायपुर के पॉश इलाके लाभांडी में आलीशान फ्लैट की खरीदारी।
  •   नवा रायपुर के प्रीमियम गोल्फ कोर्स इलाके में बेशकीमती संपत्तियों में निवेश।
  •   दुर्ग जिले के आस-पास जमीनों का बड़ा अंबार लगाना।

सूत्रों की मानें तो सीबीआई जल्द ही त्रिपाठी की बेनामी और अचल संपत्तियों की एक विस्तृत सूची का आधिकारिक खुलासा कर सकती है, जिससे कई और राज फाश होंगे।

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कमाई अठन्नी और खर्चा रुपैया का खेल

जांच एजेंसी के सामने सबसे चौंकाने वाला पहलू त्रिपाठी का अथाह 'खर्च' रहा। सीबीआई की विस्तृत पड़ताल में सामने आया है कि इस अफसर ने अपनी कुल आय से कहीं अधिक पैसा बाजार में उड़ेल दिया है।

 कुल वैध आय:  लगभग 9 करोड़ रुपए।

 कुल खर्च और निवेश:10.97 करोड़ रुपए।

इस बेहिसाब रकम को विदेशी निवेश, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियों में बेखौफ लगाया गया। जब सीबीआई ने इन निवेशों और अंधाधुंध खर्चों को लेकर त्रिपाठी से पूछताछ की, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और सवालों से बचते नजर आए। 

 अवैध शराब का खेल

अरुणपति त्रिपाठी कोई साधारण प्रशासनिक अधिकारी नहीं थे। वे मूल रूप से भारतीय दूरसंचार सेवा (ITS) के अधिकारी थे, जो प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर छत्तीसगढ़ आए थे। एक टेलीकॉम अफसर का आबकारी विभाग में आकर जड़ें जमा लेना अपने आप में हैरान करने वाला था। आरोप है कि साल 2019 से 2023 के बीच उन्होंने अपने पद और रसूख का भरपूर दुरुपयोग किया। उनके कार्यकाल में सरकारी शराब दुकानों (आउटलेट्स) के जरिए अवैध शराब की बेहिसाब बिक्री करवाई गई। इसी अवैध बिक्री ने एक बड़े शराब सिंडिकेट को फलने-फूलने का मौका दिया, जिससे सरकारी खजाने को सीधे तौर पर 3,200 करोड़ का चूना लगा।

क्या अब बाकी 70 रसूखदारों की है बारी?

अरुणपति त्रिपाठी पर सीबीआई की इस पहली एफआईआर को एक बड़े 'वार्म-अप' के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले राज्य की EOW-ACB ने इस पूरे मामले में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, अनिल टुटेजा और निरंजन दास जैसे दिग्गज नौकरशाहों को नामजद किया है। कुल मिलाकर 70 से ज्यादा लोग जांच के घेरे में हैं।

सत्ता के गलियारों में हड़कंप:

सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ सरकार अब सीबीआई को अन्य दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी इसी तरह की सख्त जांच की अनुमति देने पर विचार कर रही है। हालांकि, यह भी पुख्ता चर्चा है कि आरोपी अधिकारियों की एक मजबूत लॉबी इस कार्रवाई को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। सीबीआई की इस एंट्री ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में कई और रसूखदारों के दरवाजों पर दस्तक होने वाली है।

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