सिस्टम की बड़ी नाकामी: प्रदेश के 29 हजार टीबी मरीजों की 'पोषण राशि' अटकी, 4 महीने से नहीं मिला एक भी रुपया
निक्षय पोषण योजना खुद कुपोषण का शिकार: बिना अच्छे आहार के हैवी डोज दवाएं तोड़ रहीं मरीजों का शरीर
रायपुर । प्रदेश में टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करने के बड़े-बड़े सरकारी दावों की जमीनी हकीकत सामने आ गई है। मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई 'निक्षय पोषण योजना' का पैसा सिस्टम की फाइलों में ही अटक गया है। पिछले 4 महीने से टीबी मरीजों को हर महीने मिलने वाली 1000 रुपए की सहायता राशि उनके बैंक खातों में नहीं पहुंची है। पूरे प्रदेश में 29,653 टीबी मरीज दर्ज हैं, जबकि अकेले रायपुर जिले में यह आंकड़ा 5,654 है। हजारों मरीजों का पैसा एक साथ रुकने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सामने इलाज और पौष्टिक भोजन का भारी संकट खड़ा हो गया है।
अस्पतालों के चक्कर काट रहे मरीज, अफसर दे रहे केवल आश्वासन
बीते चार महीने से योजना का पैसा रुकने के कारण मरीजों का आहार संबंधी चक्र टूट गया है। भाठागांव निवासी टीबी मरीज गौतम ने बताया कि अब पांचवां महीना शुरू हो गया है, लेकिन खातों में एक भी रुपया नहीं आया है। जब भी जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ की जाती है, तो वे केवल जल्द पैसा आने का कोरा आश्वासन देकर मरीजों को चलता कर देते हैं। इसी तरह जोरा के रहने वाले मरीज डोमेश्वर ने बताया कि उन्हें 2 महीने से इलाज और पोषण की राशि नहीं मिली है। पैसे के अभाव में रोजाना पौष्टिक आहार खरीदना और टीबी की हैवी डोज दवाओं का कोर्स जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है। बिना उचित खुराक के दवाएं मरीजों को शारीरिक रूप से और ज्यादा तोड़ रही हैं।
सरकारी से ज्यादा निजी अस्पतालों पर मरीजों का भरोसा
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले में दर्ज कुल 5,654 मरीजों में से 2,743 मरीज सरकारी अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं, जबकि 2,911 मरीज निजी अस्पतालों में जा रहे हैं। सरकारी व्यवस्था की तुलना में निजी क्लीनिकों में मरीजों का यह रुझान सीधे तौर पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है। नियमानुसार प्राइवेट डॉक्टरों के पास इलाज कराने वाले मरीज भी इस योजना के हकदार हैं। इसके लिए प्राइवेट डॉक्टर को मरीज का केस 'निक्षय पोर्टल' पर नोटिफाई कर दस्तावेज सरकारी केंद्र भिजवाने होते हैं, इसके बावजूद इन मरीजों को भी महीनों से भुगतान नहीं हो रहा है।
अधिकारी बोले- ई-केवाईसी और बैंक खाते चेक करें मरीज
मरीजों के खातों में पोषण राशि नहीं पहुंचने के मामले में राज्य क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ. संजीव मेश्राम ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि कई बार मरीजों का ई-केवाईसी (E-KYC) अपडेट नहीं होने या बैंक खाते में किसी प्रकार की दिक्कत होने के कारण राशि ट्रांसफर नहीं हो पाती। उन्होंने मरीजों को अपने बैंक खाते चेक करवाने की सलाह दी है। हालांकि, एक साथ हजारों मरीजों के खातों में तकनीकी दिक्कत आना विभागीय कार्यप्रणाली की बड़ी नाकामी की ओर इशारा करता है।
क्या है भुगतान की प्रक्रिया?
केंद्र सरकार द्वारा टीबी मरीजों के लिए चलाई जा रही निक्षय पोषण योजना के तहत सबसे पहले सरकारी या मान्यता प्राप्त क्लीनिक में जांच होती है। पुष्टि होने पर स्टाफ मरीज का नाम 'निक्षय पोर्टल' पर दर्ज करता है। निक्षय आईडी बनने के बाद इलाज चलने तक हर महीने 1000 रुपए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं।
कागजी प्रक्रिया में उलझे मरीज
योजना का लाभ लेने के लिए मरीज को अपनी स्थानीय आशा कार्यकर्ता के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी और एक चालू मोबाइल नंबर जमा करना होता है। यदि मरीज बच्चा है और उसका खाता नहीं है, तो माता-पिता या कानूनी अभिभावक का बैंक खाता और एक सहमति पत्र अस्पताल में जमा कराया जाता है। दस्तावेजों के इस पूरे चक्र के बाद भी मरीजों को भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है
मीडिया टीम स्वास्थ्य विभाग के भुगतान रजिस्टर और निक्षय पोर्टल के सर्वर लॉग्स की पड़ताल कर रही है। आगे इस बात का खुलासा किया जाएगा कि फंड राज्य स्तर पर तकनीकी खामी के कारण अटका है या केंद्र से ही बजट रोक दिया गया है।
