वन महकमे का अजब सिस्टम: 14 बड़े IFS मनचाही जगहों पर तैनात, इधर 70 पार के रिटायर्ड अफसरों से 'दिहाड़ी' पर चल रहा मुख्यालय

वन महकमे का अजब सिस्टम: 14 बड़े IFS मनचाही जगहों पर तैनात, इधर 70 पार के रिटायर्ड अफसरों से 'दिहाड़ी' पर चल रहा मुख्यालय

रायपुर.छत्तीसगढ़ वन विभाग के मुख्यालय में कामकाज चलाने का एक अलग ही तरीका अपनाया जा रहा है। पूरे राज्य के जंगलों की मॉनिटरिंग, फाइलों के निपटारे और नीतिगत निर्णयों की जिम्मेदारी जिन बड़े अधिकारियों के कंधों पर होनी चाहिए, वे अपने मूल कैडर से दूर हैं। उनकी जगह रिटायर हो चुके अफसरों को दैनिक मानदेय यानी दिहाड़ी पर रखकर सिस्टम को चलाया जा रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि विभाग के 14 वरिष्ठ आईएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारी अपने मूल विभाग को छोड़कर अन्य महकमों की ताकतवर कुर्सियों और अपने पसंदीदा राज्यों में बरसों से जमे हुए हैं।

हैरानी की बात यह है कि इन रसूखदार अफसरों की प्रतिनियुक्ति खत्म कर उन्हें वापस वन मुख्यालय लाने का कोई प्रयास अब तक नहीं दिखा है। इसके उलट, खाली कुर्सियों का काम निकालने के लिए ऐसे रेंजर और एसडीओ की सेवाएं ली जा रही हैं, जो 70 वर्ष की उम्र भी पार कर चुके हैं।

संविदा के पेंच से बचने निकाला मानदेय का रास्ता

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नियमों के मुताबिक किसी भी रिटायर्ड अधिकारी को संविदा पर रखने के लिए शासकीय स्तर पर लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई तरह की मंजूरियां लेनी होती हैं। इस तकनीकी अड़चन से बचने के लिए मुख्यालय ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। अधिकारियों को संविदा प्रक्रिया अपनाने के बजाय 'दैनिक मानदेय' पर रखा गया है, जिसमें किसी शासकीय मंजूरी की जरूरत नहीं होती। इस व्यवस्था के तहत रिटायर्ड सीसीएफ को 4500 रुपए और रेंजर व एसडीओ को 3500 रुपए तक का रोज का भुगतान किया जा रहा है।

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खजाने पर पड़ रहा है दोहरा भार

इस पूरी व्यवस्था से सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। एक तरफ जो अफसर प्रतिनियुक्ति पर बाहर गए हैं, उन्हें पूरे वेतन और सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ उनकी खाली जगह पर काम करने वाले रिटायर्ड लोगों को हर रोज हजारों रुपए का अतिरिक्त भुगतान हो रहा है।

ये अधिकारी हैं मूल कैडर से बाहर

विभाग के जो 14 वरिष्ठ अफसर अन्य जगहों पर सेवाएं दे रहे हैं, उनमें से राजू आगसिमानी पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विवेक आचार्य संस्कृति व पर्यटन विभाग में पदस्थ हैं। विश्वेष कुमार सीएसआईडीसी और मयंक अग्रवाल चिप्स में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अन्य राज्यों की बात करें तो प्रणिता पाल और राजेश कल्लाजे बैंगलोर में, डॉ. सोमा दास कोलकाता में, जे. श्रीराम कोयम्बटूर में, एमोतेमसु एओ जोरहाट में और विजया रात्रे देहरादून में पदस्थ हैं। सतोविसा समाजदार और प्रियंका पाण्डेय दिल्ली में हैं, जबकि प्रणय मिश्रा संयुक्त सचिव (वन) और नायेर विष्णुराज उप वनसंरक्षक के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

जल्द निर्णय होने की उम्मीद

मुख्यालय में अफसरों की इस कमी को लेकर वन विभाग के सचिव मनोज पिंगुआ का कहना है कि उच्च स्तर पर लगातार मंथन चल रहा है। अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है। कुछ अफसरों की प्रतिनियुक्ति खत्म करने पर विचार किया जा रहा है और जल्दी ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

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