छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर हाईकोर्ट सख्त, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन का देना होगा शपथपत्र
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की अद्यतन जानकारी मांगी है। डॉग-बाइट की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अनुपालन शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसी कड़ी में अब छत्तीसगढ़ सरकार को भी अपनी तैयारियों और जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों का विस्तृत ब्योरा देना होगा।
मंगलवार को चीफ जस्टिस के. आर. महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी पेश करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में निर्धारित की गई है। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीन दास अदालत में उपस्थित रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से मांगा अनुपालन शपथपत्र
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज सिविल रिट याचिका क्रमांक 5/2025 और उससे जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों के प्रबंधन तथा अपने निर्देशों के पालन की विस्तृत जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित हाईकोर्ट को भी सौंपी है। इसके तहत हाईकोर्ट को अपने-अपने राज्यों में सरकारी व्यवस्थाओं और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर नजर रखनी है। साथ ही प्रत्येक चार महीने में अनुपालन की समेकित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया गया है।
नसबंदी और टीकाकरण के लिए सरकार ने उठाए कई कदम
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में राज्य के मुख्य सचिव की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत किया गया था। इसमें सरकार ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए कई व्यवस्थाएं किए जाने की जानकारी दी थी।
शपथपत्र के अनुसार, राज्य में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित करने, डॉग शेल्टर बनाने, आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण अभियान चलाने जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा कुत्तों को भोजन देने के लिए निर्धारित फीडिंग स्पेस की पहचान, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा, पेट्रोलिंग टीमों का गठन, हेल्पलाइन की व्यवस्था और आम लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम भी शामिल हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल योजनाएं और व्यवस्थाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। डॉग-बाइट की घटनाओं को रोकने और आवारा कुत्तों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने के लिए इन व्यवस्थाओं का सभी जिलों में प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
नए शपथपत्र में देनी होगी जिलेवार जानकारी
हाईकोर्ट ने पहले ही राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और जिला प्रशासन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों तथा एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 का पालन सुनिश्चित कराएं।
अब राज्य सरकार को नए शपथपत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत करनी होंगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- प्रत्येक जिले में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की अद्यतन स्थिति।
- कितने आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई और कितनों को एंटी रेबीज टीका लगाया गया।
- एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर और डॉग शेल्टर की वर्तमान स्थिति।
- अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजाम।
- फीडिंग स्पेस की पहचान और उनके संचालन की जानकारी।
- हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों और उनके निराकरण का विवरण।
डॉग-बाइट की घटनाओं पर रोक लगाना बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों का वैज्ञानिक प्रबंधन और डॉग-बाइट की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। इसके लिए नसबंदी, टीकाकरण, नियमित निगरानी और स्थानीय निकायों की सक्रिय भूमिका जरूरी है।
अब दिसंबर में होने वाली अगली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत अनुपालन संबंधी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का छत्तीसगढ़ में जिला स्तर तक कितना पालन हुआ है और आम लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।
