गड्ढों में सड़क नहीं, खिले कनेर के फूल! ग्रामीणों का अनोखा विरोध, बोले- ‘अब तो जिम्मेदारों की नजर पड़े’

गड्ढों में सड़क नहीं, खिले कनेर के फूल! ग्रामीणों का अनोखा विरोध, बोले- ‘अब तो जिम्मेदारों की नजर पड़े’

पंडरिया। बारिश ने अमलीमालगी-दमापुर से कवर्धा जाने वाले मार्ग की बदहाली को और उजागर कर दिया है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भर गया है और राहगीरों के लिए यह रास्ता परेशानी के साथ-साथ हादसे का खतरा भी बन गया है। लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहे ग्रामीणों ने अब जिम्मेदारों का ध्यान खींचने के लिए अनूठा विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पानी से लबालब गड्ढों में कनेर के पौधे और फूल लगा दिए। उनका कहना है कि जब सड़क की मरम्मत नहीं हो रही, तो गड्ढों को ही फूलों से सजा दिया जाए, ताकि शायद जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस बदहाल सड़क पर पड़ सके।

सड़क के गड्ढों में ‘फूलों की खेती’, व्यवस्था पर तंज
बारिश के बाद सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों में पानी जमा है। कई जगह स्थिति ऐसी है कि सड़क कहां खत्म होती है और गड्ढा कहां शुरू होता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने इन्हीं गड्ढों में कनेर के फूल लगाकर व्यवस्था पर व्यंग्य किया। उनका कहना है कि सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो अब गड्ढों में फूल ही उगेंगे।

महत्वपूर्ण मार्ग, रोज गुजरते हैं सैकड़ों लोग
अमलीमालगी-दमापुर से कवर्धा को जोड़ने वाला यह मार्ग आसपास के कई गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से किसान, मजदूर, विद्यार्थी और दूसरे ग्रामीण रोजाना आवागमन करते हैं। सड़क खराब होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है।

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पानी में छिपे गड्ढे बन रहे हादसे का खतरा
बारिश के पानी से गड्ढे भर जाने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। वाहन चालक अचानक गड्ढे में पहुंच जाते हैं, जिससे वाहन के अनियंत्रित होने और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के मुताबिक रात के समय खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि पर्याप्त रोशनी नहीं होने से पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते।जर्जर मार्ग

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शिकायतों के बाद भी नहीं बदली सड़क की तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत को लेकर पहले भी कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। बारिश शुरू होते ही सड़क की स्थिति और खराब हो गई। जगह-जगह गड्ढे और उनमें जमा पानी अब लोगों के लिए रोज की परेशानी बन चुका है।

‘मुरुम डालने से नहीं चलेगा काम’
ग्रामीणों ने प्रशासन से सिर्फ गड्ढों में मिट्टी या मुरुम डालने के बजाय सड़क का तकनीकी निरीक्षण कर स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सड़क कई गांवों को जोड़ती है, इसलिए इसकी खराब स्थिति को केवल आवागमन की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सीधे लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मामला है।

कनेर के फूलों से दिया बड़ा संदेश
ग्रामीणों का यह विरोध भले ही अनोखा नजर आ रहा हो, लेकिन इसके पीछे संदेश साफ है, जिस सड़क के गड्ढे महीनों से नहीं भरे गए, उनमें अब फूल खिलने लगे हैं। अब देखना होगा कि ग्रामीणों के इस अनोखे प्रदर्शन के बाद संबंधित विभाग सड़क की सुध लेता है या फिर अगले मानसून तक गड्ढों में फूल खिलते रहेंगे।

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