जल संसाधन विभाग में कमीशन का खेल...सीएम के नाम पर ठेकेदार कर रहा वसूली, संविदा वाले चीफ साहब ने रेट 1% से बढ़ाकर 20% किया

जल संसाधन विभाग में कमीशन का खेल...सीएम के नाम पर ठेकेदार कर रहा वसूली, संविदा वाले चीफ साहब ने रेट 1% से बढ़ाकर 20% किया

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में इन दिनों पानी से ज्यादा कमीशन बह रहा है। रिटायरमेंट के बाद संविदा की मलाई खा रहे प्रमुख अभियंता (ईएनसी) इंद्रजीत उड़के और उनके एक चहेते ठेकेदार अनिल सिंह चंदेल ने विभाग को अपनी निजी जागीर बना लिया है। हालत यह है कि जिस 'सुविधा शुल्क' का रेट पहले 1 प्रतिशत हुआ करता था, उसे इस जोड़ी ने 20 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। हद तो तब हो गई जब इस वसूली के लिए सीधे मुख्यमंत्री और विभाग के ईमानदार सचिव तक का नाम खुलेआम बाजार में बेचा जा रहा है।

डाटा सेंटर बना ठेकेदार का 'कलेक्शन सेंटर'

आरोप है कि ठेकेदार अनिल सिंह चंदेल की विभाग में इतनी चलती है कि वह रोज सिविल लाइंस स्थित डाटा सेंटर में जमा रहता  है। विभाग का फंड किसे मिलेगा और किसे नहीं, यह कोई सरकारी बाबू नहीं बल्कि यह ठेकेदार तय करता है। अगर डाटा सेंटर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं, तो सारा सच सामने आ जाएगा कि आखिर एक ठेकेदार रोज वहां बैठकर कौन सी सरकारी ड्यूटी बजा रहा है। जब तक चंदेल और संबंधित अफसर या ठेकेदार के बीच कमीशन की रकम तय नहीं होती, फाइल एक इंच आगे नहीं खिसकती।

सीएम के नाम पर हर महीने वसूली टैक्स

वसूली का नेटवर्क इतना निडर हो चुका है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (जो विभागीय मंत्री भी हैं) के नाम पर हर महीने हर डिवीजन (संभाग) से 15,000 रुपये वसूले जा रहे हैं। इसके अलावा साल में एक बार 2 लाख रुपये का अलग से टैक्स बांधा गया है। इतना ही नहीं, विभाग के सचिव राजेश टोप्पो, जिनकी छवि एक साफ-सुथरे अफसर की है, उन्हें भी नहीं बख्शा गया। टेंडर पास कराने के नाम पर यह कहकर पैसे ऐंठे जा रहे हैं कि 'ऊपर' सचिव साहब को भी हिस्सा देना है। जो इस नई 'टैक्स व्यवस्था' के तहत मुंहमांगी रकम नहीं देता, उसका फंड और नए टेंडर वहीं रोक दिए जाते हैं।

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कमीशन का नया 'मेन्यू कार्ड'

सरकारी सिस्टम में सुविधा शुल्क कोई नई बात नहीं है, लेकिन संविदा वाले साहब ने जाते-जाते जो नई रेट लिस्ट बनाई है, वह महंगाई को भी मात दे रही है। जरा इनके कमीशन का नया मेन्यू कार्ड देखिए

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  एआर (AR) कार्यों का फंड: पहले कमीशन 1% था, अब सीधे 20% कर दिया गया है।
  रेगुलर कार्यों का फंड: पहले 0.50% लगता था, अब दोगुना यानी 1% हो गया है।
 
अनुपूरक (Supplementary) स्वीकृति: पहले महज 0.10% था, जिसे अब 7% तक पहुंचा दिया गया है।
साहब को कमीशन चाहिए, मेंटेनेंस भाड़ में जाए

इस 20% वाले विकास टैक्स से विभाग के कई अफसर भी हार मान चुके हैं। उन्होंने तंग आकर बांधों और जलाशयों के मेंटेनेंस का काम ही बंद कर दिया है। आखिर 20% कमीशन ठेकेदार और साहब को नकद देने के बाद बचे हुए पैसों से ठेकेदार सीमेंट-रेत लगाएगा या हवा से बांध बनाएगा? गुणवत्ता की तो बात ही छोड़ दीजिए, साहब को बस अपने हिस्से से मतलब है। ठेकेदार चंदेल का मुख्य काम अब सड़क या नहर बनाना नहीं, बल्कि ईएनसी साहब के करोड़ों के कमीशन की वसूली करना और उनके परिवार की 'सुख-सुविधाओं' का ख्याल रखना भर रह गया है।

बड़ी जांच एजेंसी ही निकाल सकती है सच

यह अपने आप में हैरान करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री के नाक के नीचे इतना बड़ा खेला हो रहा है और सिस्टम को इसकी भनक तक नहीं है। या शायद सबने आंखें मूंद रखी हैं। अब विभाग के ही लोग मांग कर रहे हैं कि संविदा ईएनसी इंद्रजीत उड़के और ठेकेदार अनिल सिंह चंदेल की किसी बड़ी और सक्षम एजेंसी से जांच होनी चाहिए। अगर कोई रूटीन या छोटी-मोटी जांच हुई, तो तय मानिए कि यह जोड़ी अपनी इसी काली कमाई का एक छोटा सा हिस्सा 'सुविधा शुल्क' के रूप में देकर बहुत आराम से पाक-साफ साबित हो जाएगी।

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