शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन: वेतन विसंगति, क्रमोन्नति और 7 सूत्रीय मांगों को लेकर नवा रायपुर में हजारों सहायक शिक्षक सड़कों पर, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन: वेतन विसंगति, क्रमोन्नति और 7 सूत्रीय मांगों को लेकर नवा रायपुर में हजारों सहायक शिक्षक सड़कों पर, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबित मांगों को लेकर सहायक शिक्षकों का असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आया है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर से हजारों सहायक शिक्षक नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पहुंचे और वेतन विसंगति, क्रमोन्नति, टीईटी से जुड़े प्रावधानों में राहत तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से अपनी सात सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र बनाया जाएगा।

प्रदेशभर से पहुंचे शिक्षक, कई को रास्ते में रोका गया
धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक नवा रायपुर पहुंचे। फेडरेशन का आरोप है कि दंतेवाड़ा के कुआकोंडा, कांकेर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से बसों में आ रहे कई शिक्षकों को कुरूद के पास पुलिस ने रोककर वापस भेज दिया, जिससे अनेक शिक्षक आंदोलन में शामिल नहीं हो सके। धरना स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में शिक्षक जुटे रहे। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और लंबित मांगों को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई।

विधानसभा घेराव की अनुमति नहीं मिली
फेडरेशन के अनुसार, जिला प्रशासन ने धरना स्थल से विधानसभा की ओर प्रस्तावित रैली और घेराव की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर ही डटे रहे और कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री के नाम अभनपुर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सरकार से मांगों पर समयबद्ध निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।

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'मोदी की गारंटी' लागू करने की मांग
फेडरेशन का कहना है कि प्रदेश के करीब डेढ़ लाख सहायक शिक्षक लंबे समय से वेतन विसंगति, क्रमोन्नति और अन्य सेवा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों और 'मोदी की गारंटी' के तहत शिक्षकों से जुड़े मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया। इसी को लेकर शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।

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प्रांतीय अध्यक्ष ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र कुमार यादव ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शिक्षकों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को अगले चरण में और व्यापक रूप दिया जाएगा। फेडरेशन के अन्य पदाधिकारियों ने भी कहा कि यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा विषय है।

सात सूत्रीय प्रमुख मांगें
फेडरेशन ने सरकार के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं

  • मोदी की गारंटी के अनुरूप सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर क्रमोन्नति का लाभ दिया जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पदोन्नति में वरिष्ठता का पालन किया जाए तथा टीईटी की समय-सीमा 30 अगस्त 2028 तक सुनिश्चित की जाए।
  • कार्यरत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग द्वारा शीघ्र विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए।
  • शिक्षाकर्मी अथवा प्रथम नियुक्ति तिथि से पूरी सेवा अवधि की गणना कर पुराने सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
  • एकल शिक्षकीय स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की जाए।
  • विद्या समीक्षा केंद्र ऐप में आ रही तकनीकी और नेटवर्क संबंधी समस्याओं का समाधान होने तक ऐप के कारण किसी शिक्षक का वेतन न रोका जाए।
  • युक्तिकरण नीति के तहत मर्ज हुए प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानपाठकों को स्कूल प्रबंधन समिति में कोषाध्यक्ष का प्रभार दिया जाए।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी और शिक्षक रहे मौजूद

धरना-प्रदर्शन में फेडरेशन के प्रांतीय पदाधिकारी मनीष मिश्रा, रविंद्र राठौर, राजू टंडन, देवेंद्र हरमुख, शेषनाथ पांडे, बसंत कौशिक, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुरें, सुरजीत सिंह चौहान, सिराज बक्श, तरुण वैष्णव, गोकुल जायसवाल, आदित्य गौरव साहू, टिकेश्वर भोई, मनीष डडसेना, उमा पांडेय, नेमी सिंहा, विपिन यादव, पंकज लहरे, दिनेश नायक, चंद्रप्रकाश तिवारी, रामनरेश अजगले, कोमल साहू, सी.डी. भट्ट, रणजीत बनर्जी, आलोक त्रिवेदी, राजाराम पटेल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। फिलहाल, सरकार की ओर से इस प्रदर्शन और शिक्षकों की मांगों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि सरकार उनकी मांगों पर क्या फैसला लेती है।

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