CG News: विकास के दावों के बीच मासूमों की प्यास का दर्द! स्कूल का हैंडपंप खराब, खेत-नाले का पानी पी रहे बच्चे
जशपुर। सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जशपुर से सामने आई एक तस्वीर इन दावों के बीच बड़ा सवाल खड़ा करती है। शासकीय प्राथमिक शाला करमघाट में पढ़ने वाले बच्चे इन दिनों अपनी प्यास बुझाने के लिए खेतों से बहकर आने वाले पानी पर निर्भर बताए जा रहे हैं। स्कूल परिसर के पास लगा हैंडपंप पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है। पानी का दूसरा इंतजाम नहीं होने के कारण बच्चों को कथित तौर पर पास के खेतों और नाले की ओर से आने वाले पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
हैंडपंप खराब, बच्चों के सामने पानी का संकट
मामला ग्राम पंचायत सुलेसा के करमघाट गांव का बताया जा रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था का प्रमुख साधन हैंडपंप ही है। लेकिन इसके खराब होने के बाद बच्चों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया।
स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो में बच्चों को ऐसे पानी का इस्तेमाल करते हुए देखा जा रहा है, जिसे खेतों से होकर आने वाला पानी बताया जा रहा है। यही तस्वीर अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस उम्र में बच्चों को साफ और सुरक्षित पेयजल मिलना चाहिए, उसी उम्र में उन्हें पानी के लिए ऐसे स्रोतों पर निर्भर क्यों होना पड़ रहा है?
शिकायतों के बावजूद समस्या बनी रहने का दावा
ग्रामीणों और स्कूल से जुड़े लोगों के मुताबिक हैंडपंप खराब होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद कई दिनों से समस्या का समाधान नहीं होने का दावा किया जा रहा है। पेयजल की यह स्थिति सिर्फ सुविधा का मामला नहीं है। यदि बच्चों को असुरक्षित या दूषित पानी पीना पड़ रहा है, तो इससे उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा पैदा हो सकता है। खासकर प्राथमिक स्कूल के छोटे बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
एक तरफ पढ़ाई, दूसरी तरफ पानी की तलाश
स्कूल आने वाले बच्चों के लिए दिन की शुरुआत पढ़ाई से होनी चाहिए, लेकिन यहां पेयजल की व्यवस्था ही बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। गर्मी और धूप के बीच बच्चों को प्यास लगने पर सुरक्षित पानी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति उनकी परेशानी को और बढ़ा सकती है। यह सवाल भी अहम है कि स्कूल में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था क्यों नहीं की गई? जब तक हैंडपंप ठीक नहीं होता, तब तक बच्चों के लिए साफ पानी की तत्काल व्यवस्था कौन करेगा?
BEO बोले- जल्द ठीक कराया जाएगा बोरिंग
मामले को लेकर बगीचा BEO सुदर्शन पटेल का कहना है कि उन्हें समस्या की जानकारी मिली है। संबंधित तकनीकी टीम को हैंडपंप/बोरिंग को जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि खराब हैंडपंप वास्तव में कितनी जल्दी सुधरता है और बच्चों को कब तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो पाता है।
सवाल सिर्फ एक हैंडपंप का नहीं…
करमघाट की यह तस्वीर केवल एक खराब हैंडपंप की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए पीने का साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी बाधित हो गई है। अगर शिकायत के बाद भी समस्या कई दिनों तक बनी रहती है, तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल जरूरत किसी बयान या आश्वासन की नहीं, बल्कि तत्काल साफ पेयजल उपलब्ध कराने और खराब हैंडपंप को जल्द चालू करने की है। क्योंकि स्कूल में बच्चों की किताबें सूखी रहनी चाहिए, लेकिन उनकी प्यास बुझाने वाला पानी गंदा नहीं।
