पहली ही बारिश में बह गई करोड़ों की निर्माणाधीन नहर: 5 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले- शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
बलरामपुर। किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही भाला-गिरवानी नहर परियोजना पहली ही तेज बारिश की परीक्षा में फेल हो गई। निर्माणाधीन कंक्रीट नहर का एक हिस्सा मूसलाधार बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया होता तो नहर पहली ही बारिश में नहीं टूटती।
इस घटना ने न केवल निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही परियोजना का यह हाल भविष्य में बड़े नुकसान का संकेत है।
पहले ही जताई थी गुणवत्ता को लेकर आपत्ति
स्थानीय किसानों सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को गुणवत्ता संबंधी शिकायतें दी थीं। उनका आरोप है कि नहर निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री अपेक्षित गुणवत्ता की नहीं थी। इसके अलावा कंक्रीट डालने के बाद उसकी उचित देखरेख, क्योरिंग और समतलीकरण का कार्य भी सही तरीके से नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने समय रहते निरीक्षण या सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की। अब पहली ही बारिश में नहर टूटने के बाद उनकी आशंकाएं सही साबित होती दिखाई दे रही हैं।
इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ की निगरानी पर भी सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर विभाग के जिम्मेदार इंजीनियर नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते थे। वहीं ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी भी अधिकांश समय अनुपस्थित रहते थे। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी प्रभावित हुई और लापरवाही का परिणाम नहर टूटने के रूप में सामने आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
सैकड़ों किसानों की उम्मीदों को झटका
भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसान इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। इस नहर के माध्यम से खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचने की उम्मीद थी, जिससे खेती की लागत कम होती और उत्पादन बढ़ने की संभावना थी। लेकिन निर्माणाधीन नहर के क्षतिग्रस्त होने से किसानों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में अभी से पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है और करोड़ों रुपये की सरकारी राशि भी बर्बाद हो सकती है।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की पड़ताल की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि किसानों से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने दी सफाई
मामले में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नारायण प्रसाद डहरिया ने बताया कि नहर के जिस हिस्से में क्षति हुई है, वहां सीडी (क्रॉस ड्रेनेज) संरचना का निर्माण किया जाना था। इसके लिए ठेकेदार को पहले ही निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसी बीच अचानक तेज बारिश होने से पानी का दबाव बढ़ गया और निर्माणाधीन नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने कहा कि परियोजना अभी निर्माणाधीन है, इसलिए टूटे हुए हिस्से का पुनर्निर्माण ठेकेदार से कराया जाएगा। साथ ही जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
