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बिलासपुर का 1100 करोड़ का बजट: फिर दिखाए जाएंगे फ्री वाई-फाई और पिंक टॉयलेट के सपने, 8 साल से 8 बड़ी घोषणाएं हवा-हवाई
बिलासपुर। नगर निगम अप्रैल के पहले हफ्ते में अपना अब तक का सबसे बड़ा, करीब 1100 करोड़ रुपए का बजट पेश करने जा रहा है। इस बार फिर शहर की जनता को स्मार्ट वेंडिंग जोन, फ्री वाई-फाई और पिंक टॉयलेट जैसे नए और लुभावने सपने दिखाए जाएंगे। शहर की सड़कों, नालियों और डिवाइडर को चमकाने के नाम पर 47 करोड़ रुपए बहाने की तगड़ी तैयारी है।
लेकिन कड़वा सच यह है कि पिछले आठ सालों में निगम का बजट 776 करोड़ से बढ़कर 1100 करोड़ तक पहुंच गया, पर जमीन पर काम सिफर रहा। अमेरी का स्टेडियम हो या महिलाओं का ट्रेनिंग सेंटर, पुरानी 8 बड़ी घोषणाएं आज भी फाइलों में धूल फांक रही हैं। योजनाएं हर साल बजट में दोहराई जाती हैं, लेकिन उन पर एक ईंट भी नहीं रखी जाती।
इस बार के बजट में क्या हैं नए 'लॉलीपॉप'?
निगम इस बार शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं और महिलाओं पर फोकस करने का दावा कर रहा है। बजट में ये प्रमुख प्रस्ताव शामिल किए गए हैं:
- सड़क और नाली: बुनियादी सुविधाओं का रोना रो रही जनता के लिए नगर उत्थान योजना के तहत सड़क और नालियों के निर्माण पर 30 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है।
- सौंदर्यीकरण का खेल: प्रमुख चौक-चौराहों और डिवाइडर को सजाने के नाम पर 12 करोड़ और सड़कों के किनारे पेड़-पौधे लगाने के लिए 5 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
- स्मार्ट वेंडिंग जोन: छोटे कारोबारियों और ठेले वालों को व्यवस्थित करने के लिए स्मार्ट वेंडिंग जोन और फूड स्ट्रीट पर 5 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
- फ्री वाई-फाई और पैड: युवाओं को पढ़ाई के लिए फ्री वाई-फाई और छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड बांटने की योजना है।
- पिंक टॉयलेट: महिलाओं की सुविधा के लिए हर जोन में पिंक टॉयलेट और सुरक्षित पिंक गार्डन बनाने का वादा किया जा रहा है।
बजट बढ़ा, लेकिन काम का अता-पता नहीं निगम का बजट तो हर साल गुब्बारे की तरह फूल रहा है, लेकिन टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। निगम सिर्फ कागजों पर स्मार्ट सिटी बना रहा है। अमेरी में 50 एकड़ जमीन पर स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का बड़ा सपना दिखाया गया था। आज तक फंड का रोना रोकर इस प्रोजेक्ट को लटका कर रखा गया है। - महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 750 सीटों वाला आजीविका प्रशिक्षण केंद्र बनना था, वह भी आज तक नहीं बना। 2 करोड़ फूंककर अर्बन कॉटेज और सर्विस इंडस्ट्रीज पार्क बना दिया गया, लेकिन आज तक इसका कोई सही इस्तेमाल नहीं हो पाया। यह सीधा-सीधा जनता के पैसों की बर्बादी है।
शहर की ये 8 बड़ी घोषणाएं जो आज तक अधूरी हैं:
- सभागृह निर्माण: 3.50 करोड़ का प्रावधान था, काम आज भी अधूरा है।
- महिला आजीविका केंद्र: 750 सीट का ट्रेनिंग सेंटर सिर्फ फाइलों में दफन है।
- अमेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: 50 एकड़ का स्टेडियम फंड के अभाव में अटका है।
- महिला उद्यान: 50 लाख का बजट था, आज तक पार्क का वजूद नहीं।
- सामुदायिक भवन: वार्डों में भवन निर्माण का काम सालों से अटका पड़ा है।
- आवासीय कॉलोनी: निगम कर्मचारियों के लिए कॉलोनी बनाने का वादा झूठा निकला।
- सब्जी मार्केट: मंगला में सब्जी मार्केट बनाने की योजना ठंडे बस्ते में है।
- 50 हेल्थ कियोस्क: इनके लिए 3 करोड़ रुपए का बजट था, आज तक नहीं खुले।
ऐसे बढ़ता गया निगम का बजट, काम वहीं का वहीं
2018-19: 776 करोड़ 77 लाख
2019-20: 767 करोड़ 22 लाख
2020-21: 791 करोड़ 5 लाख
2021-22: 819 करोड़ 41 लाख
2022-23: 943 करोड़ 46 लाख
2023-24: 1024 करोड़ 72 लाख
2024-25: 1051 करोड़ 94 लाख
2025-26: 1089 करोड़ रुपए
महापौर का रटा-रटाया जवाब
महापौर पूजा विधानी का इस नए बजट पर कहना है, "अप्रैल के पहले सप्ताह में हम बजट पेश करेंगे। यह अब तक का सबसे बड़ा बजट होगा। इस बार हमारा फोकस छोटे-छोटे विकास कार्यों पर है। चौक-चौराहों, डिवाइडरों के सौंदर्यीकरण और सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही छात्रों के लिए फ्री वाई-फाई और महिलाओं की सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं भी शामिल की गई हैं।"
अब देखना यह है कि यह नया बजट शहर की सूरत बदलता है, या फिर पिछली 8 घोषणाओं की तरह यह भी सिर्फ एक चुनावी और कागजी झुनझुना ही साबित होता है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
