महतारी वंदन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा... सरकारी कर्मचारी ही बन गए हितग्राही, अब होगी लाखों की रिकवरी
बिलासपुर : जिस योजना का मकसद जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहारा देना था, उसी योजना की राशि पर सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर हाथ साफ कर दिया । महतारी वंदन योजना में नियमों को दरकिनार कर सरकारी शिक्षिकाओं, महिला कर्मचारियों और सरकारी कर्मचारियों की पत्नियों के लाभ लेने का मामला सामने आया है । शुरुआती पड़ताल में बिलासपुर जिले में ऐसे 200 से ज्यादा मामले सामने आने की जानकारी है । अकेले बिल्हा ब्लॉक में 11 ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है । मामला सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग से लेकर स्कूल शिक्षा विभाग तक हड़कंप मचा हुआ है ।
सरकारी नौकरी, फिर भी योजना का लाभ
महतारी वंदन योजना के नियमों के मुताबिक ऐसे परिवार योजना के लिए पात्र नहीं हैं, जिनका कोई सदस्य केंद्र या राज्य सरकार के विभाग, बोर्ड, उपक्रम या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी अथवा संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। इसके बावजूद सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों की पत्नियों के योजना का लाभ लेने की जानकारी सामने आई है ।
अब प्रश्न यह उठता है कि सरकारी नौकरी करने वाले परिवारों के नाम योजना की पात्रता सूची में कैसे शामिल हुए और उन्हें लगातार राशि का भुगतान कैसे होता रहा?
शिकायतों के बाद शुरू हुई पड़ताल
मामले की शिकायतें मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने खंड स्तर के अधिकारियों को हितग्राहियों की वास्तविक स्थिति की जांच करने और गहन सर्वे करने के निर्देश दिए । जांच के दौरान केवल हितग्राही का नाम ही नहीं, बल्कि उनके पति का व्यवसाय, महिला का रोजगार और परिवार की अन्य संबंधित जानकारी जुटाने को कहा गया । इसी पड़ताल के दौरान सरकारी विभागों से जुड़े कई लोगों के योजना का लाभ लेने की जानकारी सामने आई ।
बिल्हा में 11 मामले, जिले में आंकड़ा 200 पार
जांच के दौरान बिल्हा ब्लॉक में 11 मामले सामने आए हैं । वहीं, बिलासपुर जिले में ऐसे मामलों की संख्या 200 से अधिक होने की जानकारी सामने आ रही है । हालांकि अंतिम आंकड़ा विस्तृत सत्यापन और विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा । मामले की गंभीरता को देखते हुए अब संबंधित विभागों ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है ।
अब होगी सरकारी राशि की रिकवरी
सरकारी नौकरी में रहते हुए महतारी वंदन योजना की राशि लेने वाली शिक्षिकाओं और कर्मचारियों से अब योजना के तहत मिली राशि की वसूली की जाएगी । बिल्हा के बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ऐसे शिक्षक और बाबू चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद योजना की राशि प्राप्त की । उन्होंने बताया कि संबंधित लोगों को राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं । यदि तय समय में राशि जमा नहीं की जाती है तो वेतन से रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी । जिले के अन्य विकासखंडों में भी बीईओ स्तर से संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
नियमों में पहले से साफ थी अपात्रता
महतारी वंदन योजना में पात्रता के लिए महिला का छत्तीसगढ़ की स्थायी निवासी होना और विवाहित होना जरूरी है । विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं भी पात्रता के दायरे में आती हैं । आवेदन करने वाले की 1 जनवरी को महिला की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए ।
वहीं, ऐसे परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकते, जिनका कोई सदस्य आयकरदाता हो या परिवार का कोई सदस्य केंद्र अथवा राज्य सरकार के विभाग, बोर्ड, उपक्रम या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी या संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत हो ।
जांच बढ़ी तो और खुल सकते हैं मामले
फिलहाल सामने आए मामलों ने योजना के सत्यापन और पात्रता जांच की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं । विभागीय स्तर पर जांच आगे बढ़ने के साथ ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है । अब देखना होगा कि जांच में कितने सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य अपात्र पाए जाते हैं और उनसे कितनी राशि की वसूली होती है । साथ ही, नियमों के बावजूद अपात्र लोगों के नाम योजना में शामिल होने के पीछे जिम्मेदार प्रक्रिया की भी जांच होती है या नहीं ।
अधिकारियों को मामले की नहीं हैं कोई जानकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह ने बताया कि वे फिलहाल पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी के कारण बाहर हैं । उन्होंने कहा कि इस समय वे बातचीत करने की स्थिति में नहीं हैं और बाद में बात कर पाएंगे ।
बिल्हा की परियोजना अधिकारी किरण खेडकर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में प्रभार संभाला है, इसलिए उन्हें इस मामले की पूर्व की जानकारी नहीं है । वहीं, बिलासपुर के परियोजना अधिकारी मिलिंद द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान में मामलों की स्क्रूटनी चल रही है । यदि जांच के दौरान किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित राशि की रिकवरी की जाएगी । इसके लिए यूटीआर के माध्यम से राशि वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी ।
