घोषणा के दो साल बाद भी अटका एडल्ट बीसीजी टीकाकरण प्रदेश में 40 हजार टीबी मरीजों की जान दांव पर

घोषणा के दो साल बाद भी अटका एडल्ट बीसीजी टीकाकरण प्रदेश में 40 हजार टीबी मरीजों की जान दांव पर

रायपुर। राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ में क्षय रोग के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। केंद्र सरकार के निर्देश पर एडल्ट बीसीजी टीकाकरण की घोषणा हुए दो साल का लंबा वक्त बीत चुका है लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक यह अहम अभियान शुरू नहीं हो सका है। वर्तमान में राज्य के भीतर 40 हजार से अधिक टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। हालात यह हैं कि जांच के लिए भेजे गए वैक्सीन के सैंपल की रिपोर्ट भी अब तक विभाग को नहीं मिल सकी है जिसके कारण पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के स्पष्ट दिशा निर्देशों के बावजूद विभागीय सुस्ती के चलते अभियान का क्रियान्वयन अब तक शून्य है। योजना के तहत शुरुआती दौर में 7 जिलों में संदिग्ध टीबी मरीजों की बाकायदा स्क्रीनिंग भी की गई थी और टीकाकरण की शुरुआत जुलाई महीने से होनी थी। इसके लिए जिले के ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका था तथा मितानिनों को जरूरतमंद लोगों की पहचान करने की अहम जिम्मेदारी भी सौंप दी गई थी। तय गाइडलाइन के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी नागरिकों के लिए यह टीका अनिवार्य किया गया था। वहीं 18 से 60 वर्ष के आयु वर्ग में केवल उन लोगों को टीका लगाया जाना था जो पूर्व में टीबी के मरीज रह चुके हैं या टीबी मरीजों के साथ निवास करते हैं अथवा सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं।

समय पर टीकाकरण पर्याप्त पोषण आहार और समुचित दवाइयों पर जिम्मेदारों द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण मरीजों की मृत्यु का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। अकेले रायपुर जिले के भयावह आंकड़ों पर गौर करें तो बीते चार वर्षों में 14 सौ से अधिक टीबी मरीजों ने दम तोड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2022 में 314 मरीजों की जान गई जबकि 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 383 तक पहुंच गया। इसी तरह वर्ष 2024 में 400 और वर्ष 2025 में 344 लोगों ने टीबी से अपनी जान गंवाई है।

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प्रथम चरण में टीकाकरण अभियान के लिए प्रदेश के उन 14 जिलों का चयन किया गया था जहां टीबी मरीजों की संख्या बाकी जिलों की तुलना में सर्वाधिक है। इस चयनित सूची में रायपुर बलरामपुर बेमेतरा गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जशपुर कवर्धा सरगुजा दंतेवाड़ा कोण्डागांव महासमुंद गरियाबंद नारायणपुर और सुकमा शामिल थे। इन संवेदनशील क्षेत्रों में मरीजों को राहत देने की योजना फिलहाल कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है।

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इस भारी विलंब और प्रशासनिक ढिलाई के संबंध में छत्तीसगढ़ के राज्य क्षय अधिकारी डॉ संजीव मेश्राम का कहना है कि टीकाकरण अभियान किन कारणों से रुका हुआ है इसका विभागीय स्तर पर अपडेट लिया जाएगा और इसके बाद ही आगे की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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