जगदलपुर नगर निगम की बड़ी लापरवाही: बाढ़ पीड़ितों के लिए आया राशन सड़ा, 200 परिवारों तक नहीं पहुंची राहत सामग्री

जगदलपुर नगर निगम की बड़ी लापरवाही: बाढ़ पीड़ितों के लिए आया राशन सड़ा, 200 परिवारों तक नहीं पहुंची राहत सामग्री

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सितंबर माह में चक्रवाती तूफान और बाढ़ से प्रभावित जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए जुटाई गई खाद्य सामग्री नगर निगम कार्यालय के स्टोर रूम में पड़ी-पड़ी खराब हो गई। करीब एक महीने तक राशन का वितरण नहीं होने के कारण आलू, प्याज समेत अन्य खाद्य सामग्री सड़ने लगी। मामला तब उजागर हुआ, जब निगम कार्यालय के कमरा नंबर 13 से दुर्गंध आने लगी और बदबू पूरे कार्यालय में फैल गई। इसके बाद आनन-फानन में कमरा खोलकर देखा गया, जहां राहत सामग्री खराब हालत में मिली।

200 से अधिक परिवारों के लिए जुटाया गया था राशन

जानकारी के अनुसार, बस्तर में चक्रवाती तूफान और बाढ़ के कारण सैकड़ों मकान ढह गए थे, जबकि हजारों एकड़ में लगी फसलें बर्बाद हो गई थीं। इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए शहर के कई समाजसेवियों और सामाजिक संगठनों ने आगे आकर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई थी।

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जिन इलाकों में सामाजिक संगठनों के सदस्य सीधे नहीं पहुंच पा रहे थे, वहां जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई थी। इसी उद्देश्य से 200 से अधिक परिवारों के लिए आलू, प्याज, दाल, चावल और अन्य राशन सामग्री निगम कार्यालय में रखी गई थी।

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हालांकि, समय पर वितरण नहीं होने के कारण यह सामग्री स्टोर रूम में ही पड़ी रही। अब इसमें से कई खाद्य पदार्थ खराब होने की बात सामने आई है। इस घटना के बाद राहत सामग्री के रखरखाव, वितरण व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने महापौर और अधिकारियों पर लगाए आरोप

मामला सामने आने के बाद नगर निगम में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। निगम के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने इस घटना के लिए महापौर और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है।

राजेश चौधरी का आरोप है कि शहर के समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के उद्देश्य से खाद्य सामग्री नगर निगम को सौंपी थी, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाई जा सके। लेकिन निगम की लापरवाही के कारण करीब 200 परिवारों के लिए रखी गई सामग्री स्टोर रूम में ही पड़ी रह गई और अब उसका एक हिस्सा वितरण के योग्य नहीं बचा है।

उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए निगम की राहत वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

महापौर बोले- लापरवाही हुई है, जिम्मेदार कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई

वहीं, नगर निगम के महापौर संजय पांडे ने मामले में लापरवाही होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, महापौर ने कांग्रेस पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी का कमरा भी उसी कमरा नंबर 13 के सामने है, जहां राशन सामग्री रखी गई थी। ऐसे में उनकी भी जिम्मेदारी थी कि समय रहते सामग्री के वितरण के लिए पहल करते।

महापौर ने दावा किया कि खाद्य सामग्री में केवल करीब 10 किलो आलू और प्याज ही खराब हुए हैं, जबकि बाकी राशन सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि शेष सामग्री का वितरण जल्द ही जरूरतमंद परिवारों के बीच कराया जाएगा।

राहत सामग्री खराब होने से व्यवस्था पर उठे सवाल

बाढ़ और चक्रवाती तूफान से प्रभावित परिवारों के लिए जुटाई गई खाद्य सामग्री का समय पर वितरण नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रभावित लोगों को भोजन और जरूरी सामान उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में राहत सामग्री का लंबे समय तक स्टोर रूम में पड़े रहना और उसका खराब होना गंभीर मामला है।

अब देखना होगा कि नगर निगम इस मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और सुरक्षित बची खाद्य सामग्री जरूरतमंद परिवारों तक कितनी जल्दी पहुंचाई जाती है। साथ ही, राहत सामग्री के वितरण में देरी और खाद्य पदार्थों के खराब होने की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच और जवाबदेही भी अहम होगी।

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