25 हजार की कथित रिश्वत, वायरल वीडियो ने खोली पोल, पटवारी निलंबित
बिलासपुर : जमीन का बंटवारा कराने के नाम पर कथित रिश्वत मांगने और लेने के मामले में पचपेड़ी में पदस्थ पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी पर आखिरकार प्रशासन का शिकंजा कस गया है। सोशल मीडिया और समाचार पोर्टलों पर वायरल हुए वीडियो को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तहसीलदार पचपेड़ी की जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई।
50 हजार में तय हुआ था सौदा, 25 हजार पर अटका मामला
वायरल वीडियो में जमीन बंटवारे से जुड़े काम के बदले कथित तौर पर पैसों के लेनदेन की बातचीत दिखाई देती है। बताया जा रहा है कि जमीन बंटवारे के लिए 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था, जिसमें 25 हजार रुपये पटवारी के हिस्से के बताए जा रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति नोटों की गड्डी देते हुए नजर आता है। इसी दौरान पटवारी के कथित तौर पर यह कहने की बात सामने आई कि इतनी रकम से काम नहीं चलेगा। वीडियो में पटवारी एक अन्य व्यक्ति से उसकी पहचान भी पूछता दिखाई देता है। जवाब में वह खुद को जमीन का खरीदार बताता है।
चार महीने पुराना बताया जा रहा वीडियो
जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो करीब चार महीने पुराना बताया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद मस्तूरी एसडीएम बजरंग वर्मा ने तहसीलदार प्रकाश साहू को जांच के निर्देश दिए थे। पटवारी को बयान दर्ज कराने के लिए मस्तूरी बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद तहसीलदार पचपेड़ी ने 28 अक्टूबर 2026 को अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद कलेक्टर ने निलंबन का आदेश जारी किया। प्रशासन ने पटवारी के कृत्य को सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत और गंभीर कदाचरण की श्रेणी में माना है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऐसे कृत्य से शासन की छवि धूमिल होती है।
सात दिन में आरोप पत्र, कोटा में रहेगा मुख्यालय
पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी पहले पटवारी हल्का नंबर 14 में पदस्थ थे। वर्तमान में उनकी तैनाती तहसील पचपेड़ी के पटवारी हल्का नंबर 05 में थी। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोटा कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। कलेक्टर ने तहसीलदार पचपेड़ी को संबंधित पटवारी के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन फिलहाल मामले को केवल निलंबन तक सीमित रखने के बजाय आगे की विभागीय कार्रवाई की तैयारी में है।
