सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न क्यों होती है? जानें मॉर्निंग स्टिफनेस के कारण, संकेत और राहत के उपाय

सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न क्यों होती है? जानें मॉर्निंग स्टिफनेस के कारण, संकेत और राहत के उपाय

सुबह नींद से उठते ही हाथ-पैरों और जोड़ों में अकड़न महसूस होना बढ़ती उम्र के साथ एक आम समस्या बनती जा रही है। कई लोगों को बिस्तर से उठने और सामान्य रूप से चलने-फिरने में कुछ समय लगता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को "मॉर्निंग स्टिफनेस" कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल उम्र बढ़ने का असर नहीं बल्कि कई बार जोड़ों से जुड़ी किसी बीमारी या शरीर में चल रही सूजन का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि जोड़ों के बीच मौजूद साइनोवियल फ्लूइड नामक तरल पदार्थ उन्हें आसानी से चलने में मदद करता है। रातभर शरीर के स्थिर रहने पर यह तरल पदार्थ कार्टिलेज द्वारा अवशोषित हो जाता है, जिससे सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न महसूस हो सकती है। कुछ देर चलने-फिरने और गतिविधि करने के बाद यह समस्या सामान्य रूप से कम हो जाती है। हालांकि यदि अकड़न बार-बार हो रही हो या लंबे समय तक बनी रहे तो इसके पीछे ऑस्टियोआर्थराइटिस, रुमेटाइड आर्थराइटिस या अन्य जोड़ों से संबंधित बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है, जिससे सुबह की अकड़न आमतौर पर 30 मिनट के भीतर कम हो जाती है। वहीं रुमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ही जोड़ों पर हमला करने लगता है। इस स्थिति में अकड़न एक घंटे या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है। इसके अलावा विटामिन D और कैल्शियम की कमी, गलत सोने की मुद्रा तथा लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता भी जोड़ों की जकड़न को बढ़ा सकती है।

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यदि सुबह की अकड़न लगातार बनी रहती है, तो विशेषज्ञ रूमेटोलॉजिस्ट या आर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह देते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट और एक्स-रे के जरिए समस्या की सही वजह का पता लगाया जा सकता है। राहत के लिए सुबह उठते ही हल्की स्ट्रेचिंग, प्रभावित हिस्से पर गर्म सिकाई और नियमित शारीरिक गतिविधियां फायदेमंद हो सकती हैं। साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड, हल्दी और अदरक जैसे एंटी-इन्फ्लेमेटरी खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना भी लाभकारी माना जाता है।

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