छत्तीसगढ़ कृषि विभाग का अजब खेल: फील्ड में 1320 पद खाली, फिर भी अफसर बीज निगम में काट रहे मलाई; विधानसभा में गूंजा मुद्दा

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग का अजब खेल: फील्ड में 1320 पद खाली, फिर भी अफसर बीज निगम में काट रहे मलाई; विधानसभा में गूंजा मुद्दा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में किसानों के नाम पर सियासत तो खूब होती है, लेकिन जमीन पर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। प्रदेश के कृषि विभाग का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जो सीधे तौर पर सिस्टम की नीयत पर सवाल उठाता है। एक तरफ गांवों में किसानों को खेती-किसानी की जानकारी देने वाले मैदानी अफसरों का भारी टोटा है। वहीं दूसरी तरफ, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (REO) अपना मूल काम छोड़कर बीज निगम में ऊंचे पदों पर मलाई काट रहे हैं।

हालात यह हैं कि खेत खाली पड़े हैं और साहब लोग एसी कमरों में बैठकर फाइलों का वजन बढ़ा रहे हैं। यह मुद्दा जब विधानसभा में गूंजा, तो खुद कृषि मंत्री को भी मानना पड़ा कि विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

विधानसभा में खुली विभाग की पोल

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खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के विधायक भोलाराम साहू ने 20 मार्च 2026 को विधानसभा में एक ऐसा सवाल दागा, जिसने अफसरों की बोलती बंद कर दी। उन्होंने सीधा पूछा कि जब विभाग में पहले से ही कर्मचारियों की इतनी कमी है, तो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को उनके मूल पद से हटाकर बीज निगम में उच्च पदों पर डेप्युटेशन (प्रतिनियुक्ति) किस नियम से दे दी गई?

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इस सवाल पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम को बैकफुट पर आना पड़ा। सदन में उन्होंने साफ-साफ स्वीकारा कि कृषि विभाग में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के कुल 4456 पद स्वीकृत हैं। लेकिन असलियत में केवल 3136 अधिकारी ही काम कर रहे हैं। यानी 1320 पद सीधे तौर पर खाली पड़े हैं। इतनी कमी के बावजूद भारी संख्या में इन अधिकारियों को बीज निगम में भेज दिया गया है।

कुर्सी का 'अनुपात' सेट कर रहे अफसर

यह सिस्टम का एक तीखा व्यंग्य ही है कि जिस अफसर को गांव की पगडंडियों पर जाकर किसान को खाद-बीज का सही अनुपात बताना था, वह अफसर निगम के दफ्तर में बैठकर अपनी कुर्सी का 'अनुपात' सेट करने में लगा है। विभाग में इतनी मेहरबानी क्यों और किसके इशारे पर हो रही है? जिन अधिकारियों का काम खेतों की मिट्टी जांचना था, उन्हें बीज निगम में साहब बनाकर क्यों बैठा दिया गया?

किसानों को थमा दिया गया 'लॉलीपॉप'

कृषि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि फील्ड पर अफसरों की कमी का सीधा नुकसान किसानों को हो रहा है। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें आए दिन नई कृषि योजनाओं का ऐलान करती हैं। लेकिन जब गांव में कोई कृषि अधिकारी ही नहीं होगा, तो इन योजनाओं को लागू कौन करेगा? आज किसानों को न तो तकनीकी मार्गदर्शन मिल पा रहा है और न ही बीज वितरण की सही जानकारी। सरकार की योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सिमट गई हैं और किसानों के हाथ में सिर्फ योजनाओं का 'लॉलीपॉप' थमा दिया गया है।

जिलों का हाल और भी बुरा

जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति डरावनी है। प्रदेश के 34 जिलों में हर जगह औसतन 40 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की जरूरत है।

  •   राजनांदगांव: यहां 51 पद खाली पड़े हैं।
  •   खैरागढ़-छुईखदान-गंडई: 84 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 44 पद खाली हैं।
  •  मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी: 97 पदों में से 39 पदों पर कोई अधिकारी नहीं है।

जब मैदानी स्तर पर ऐसे हालात हैं, तो खेती-किसानी भगवान भरोसे ही चलेगी।

मंत्री का आश्वासन: क्या वाकई होगी वापसी?

विधानसभा में किरकिरी होने के बाद कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने अब आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रतिनियुक्ति पर बीज निगम गए सभी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को जल्द ही उनके मूल विभाग में वापस बुलाया जाएगा। इससे मैदानी टीम मजबूत होगी और किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगा।

अब बड़ा सवाल यही है कि यह वापसी कब होगी? क्या वाकई सरकार इन 'साहबों' को वापस खेतों की धूल फांकने भेजेगी? या फिर विधानसभा का सत्र खत्म होते ही यह आश्वासन भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? अब देखना होगा कि कृषि मंत्री अपना वादा निभाते हैं या किसानों को एक बार फिर सिस्टम की लेटलतीफी का शिकार होना पड़ता है।

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