PM-AJAY में 12.48 करोड़ का खेल: IAS जगदीश सोनकर पर एजेंसी ने लगाए रुपए मांगने के आरोप; चार सेंटर निरस्त, 5838 युवाओं की ट्रेनिंग कागजों में सिमटी
रायपुर.छत्तीसगढ़ अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम में प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) के 12.48 करोड़ रुपए के काम में भारी पेंच फंस गया है। तत्कालीन प्रबंध संचालक IAS जगदीश सोनकर पर ट्रेनिंग एजेंसी MPCON Limited ने लेन-देन से संबंधित ‘अनैतिक मांग’ करने का आरोप लगाया है। एजेंसी का आरोप है कि बात नहीं मानने पर काम रोका गया। उधर, सरकारी पड़ताल में गड़बड़ी मिलने पर रायपुर, दुर्ग, रतनपुर और सारंगढ़ के ट्रेनिंग सेंटर बंद कर दिए गए हैं।
बिना टेंडर दिया काम, फिर कलेक्टरों से कराई जांच
विभागीय रिकार्ड के मुताबिक पांच केंद्रों के प्रबंधकों के जरिए MPCON को ट्रेनिंग का जिम्मा सौंपा गया था। निगम हेडक्वार्टर से एजेंसी को कोई ऑथराइजेशन लेटर या कार्यादेश तक जारी नहीं हुआ था। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में पहुंची तब पता चला कि बिना EOI या टेंडर निकाले ही एजेंसी को काम दे दिया था। इसके बाद रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सक्ती और सारंगढ़ के कलेक्टरों से पूरे मामले की जांच कराई गई।
16 जुलाई की शिकायत और चार सेंटरों पर ताला
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में 16 जुलाई 2026 को शिकायत (WP260700100615) की गई गई थी कि ट्रेनिंग की गुणवत्ता ठीक नहीं है। जांच शुरू हुई तो उपस्थिति, ट्रेनिंग का समय, ट्रेड, असेसमेंट और परीक्षा के रिकॉर्ड में भारी फर्जीवाड़ा पकड़ में आया । नतीजा यह रहा कि दुर्ग, रायपुर, रतनपुर और सारंगढ़ के ट्रेनिंग प्रोग्राम तुरंत निरस्त कर दिए गए। इसके अलावा मालखरौदा केंद्र को सात दिन का अल्टीमेटम नोटिस थमाया गया।
21 अगस्त का वो सरकारी पत्र....
पूरे मामले में 21 अगस्त 2026 का सरकारी लेटर सामने आया है, जिस पर तत्कालीन एमडी IAS जगदीश सोनकर के डिजिटल हस्ताक्षर मौजूद हैं। पत्र में साफ दर्ज है कि ट्रेनिंग केंद्रों से शिकायतें मिलीं, नोटिस जारी हुए और काम निरस्त किया गया। पत्र में यह आशंका भी दर्ज की गई कि ऐसी ट्रेनिंग जारी रहने और भुगतान होने से सरकारी खजाने को भारी चपत लग सकती है।
‘मांग पूरी नहीं की तो रोक दिया भुगतान’
इधर MPCON ने 11 अगस्त 2026 को प्रदेश की आला अधिकारियों को ई-मेल भेजकर निष्पक्ष जांच कराने को कहा। एजेंसी ने तत्कालीन एमडी पर आर्थिक लेन-देन की अननैतिक मांग रखने की बात कही है।
एजेंसी का कहना है कि नियमों से बाहर जाकर ऐसी मांग पूरी नहीं की जा सकती थी, जिसके चलते काम निरस्त करना पड़े। MPCON का दावा किया है कि उसने 45 बैच पूरे कराकर परीक्षा और सर्टिफिकेशन का रिकॉर्ड जमा करा दिया है, फिर भी भुगतान अटका कर रखा गया।
5838 युवाओं के भविष्य और भुगतान की पड़ताल बाकी
सरकारी रिकॉर्ड में ट्रेनिंग खानापूर्ति मिलने से सेंटर निरस्त हो चुके हैं, जबकि एजेंसी 45 बैच पढ़ाने का दावा ठोक रही है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि 5838 हितग्राहियों में से कितनों को हकीकत में ट्रेनिंग मिली और कितनों की सिर्फ हाजिरी भरी गई। साथ ही 12.48 करोड़ में से कितना भुगतान दबाया गया और कितना जारी हुआ, इसकी तह तक जाना बाकी है।
