ई-ऑफिस से बाहर होंगे हजारों निष्क्रिय यूजर्स, 28,792 डिजिटल आईडी में होगी छंटनी
रायपुर : सरकारी दफ्तरों में अब फाइलों का बोझ कम करने के साथ डिजिटल सिस्टम पर भी छंटनी की तैयारी है। ई-ऑफिस पोर्टल पर लॉगइन नहीं करने वाले और जिनके कामकाज में ऑनलाइन फाइलों की जरूरत नहीं है, ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की डिजिटल आईडी हटाई जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने इस संबंध में विभागों को अनावश्यक यूजर्स को तत्काल पोर्टल से रिलीव करने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि यह कार्रवाई कर्मचारियों की नौकरी पर नहीं, बल्कि ई-ऑफिस की डिजिटल यूजर आईडी पर होगी।
28,792 से घटाकर 25 हजार होगी यूजर्स की संख्या
ई-ऑफिस पोर्टल पर एक्टिव यूजर्स की संख्या लाइसेंस की निर्धारित सीमा से अधिक हो रही है। इसी को देखते हुए ईएमडी मैनेजर यूजर्स की संख्या 28,792 से घटाकर 25 हजार तक सीमित करने की तैयारी में हैं। इसके लिए विभागों को ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें पोर्टल से हटाने कहा गया है, जो ऑनबोर्ड होने के बावजूद अब तक सक्रिय नहीं हुए हैं और जिनके काम में ई-फाइल संचालन की आवश्यकता नहीं पड़ती।
शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी दायरे में
इस छंटनी के दायरे में शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और ऐसे शासकीय कर्मचारी आ सकते हैं, जिन्होंने ई-ऑफिस पोर्टल पर अब तक कोई काम नहीं किया है। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पोर्टल पर केवल उन्हीं अधिकारियों और कर्मचारियों की आईडी रहे, जिन्हें सरकारी फाइलों के ऑनलाइन संचालन की वास्तविक जरूरत है। हालांकि, किसी कर्मचारी को भविष्य में ई-ऑफिस की आवश्यकता पड़ती है तो उसे डिस्ट्रिक्ट इंस्टेंस में दोबारा जोड़ा जा सकेगा। यानी जरूरत के हिसाब से डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराने का रास्ता खुला रहेगा।
1 जनवरी 2026 से सभी सरकारी फाइलें ऑनलाइन
राज्य सरकार ई-ऑफिस व्यवस्था को प्रशासनिक कामकाज का अनिवार्य हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए 1 जनवरी 2026 से सभी शासकीय फाइलें ई-ऑफिस के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसका मकसद सरकारी कामकाज को कागजों और भौतिक फाइलों की आवाजाही से मुक्त करना है।
टेबलों के चक्कर से मिलेगी मुक्ति
प्रदेश में ई-ऑफिस सिस्टम की शुरुआत 21 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की थी। इसके जरिए फाइल तैयार करने, नोटशीट लिखने, अधिकारियों को भेजने, अनुमोदन लेने, डिजिटल हस्ताक्षर करने और आदेश जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है। पहले किसी फाइल को एक टेबल से दूसरी टेबल और एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचने में कई दिन लग जाते थे। अब डिजिटल सिस्टम में यह पता लगाया जा सकता है कि फाइल किस अधिकारी के पास लंबित है और उस पर कितनी कार्रवाई हुई है। इससे न केवल निर्णय प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है, बल्कि जवाबदेही भी तय होगी।
कागजों की जगह डिजिटल रिकॉर्ड
ई-ऑफिस राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित डिजिटल कार्यस्थल समाधान है। यह केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से सरकारी दस्तावेज, नोटशीट और फाइलें ऑनलाइन तैयार, फॉरवर्ड और डिजिटल हस्ताक्षर के साथ सुरक्षित रखी जाती हैं। इससे कागज और परिवहन पर होने वाला खर्च घटता है। साथ ही फाइलों के गुम होने और उनमें छेड़छाड़ की आशंका भी कम होती है।
