स्कूटी वाले डिप्टी सीएम का संडे सरप्राइज: 5 करोड़ की नाली के लिए बना दी 22.54 करोड़ की सड़क, पूछा- ये हड़प्पा की खोज है क्या?
बिलासपुर। रविवार की सुबह बिलासपुर में नजारा कुछ अलग ही था। कोई वीआईपी सायरन नहीं, गाड़ियों का लंबा काफिला नहीं। सुबह 7 बजते ही प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव बिना किसी औपचारिक प्रोटोकॉल के अपनी स्कूटी पर सवार होकर निकल पड़े। उनके इस अचानक निरीक्षण से नगर निगम, स्मार्ट सिटी और पीडब्ल्यूडी के अफसरों व ठेकेदारों में हड़कंप मच गया। करीब ढाई घंटे तक उन्होंने शहर के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स की जमीनी हकीकत खुद अपनी आंखों से देखी। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला कोनी में मिला, जहां पिछली कांग्रेस सरकार का एक बड़ा 'खेल' उजागर हो गया।
बिना एंट्री-एग्जिट वाली 22 करोड़ की सड़क का राज
डिप्टी सीएम सुबह करीब 7:50 बजे जब कोनी में कमिश्नर दफ्तर के पीछे बन रही 22.54 करोड़ रुपए की सड़क देखने पहुंचे, तो वहां का माजरा ही कुछ और था। इस महंगी सड़क में न तो कहीं से एंट्री (घुसने का रास्ता) है और न ही कहीं एग्जिट (बाहर निकलने का रास्ता)। इसे देखकर डिप्टी सीएम साव ने सीधे अफसरों से सवाल दाग दिया- "जब यहां आना-जाना ही नहीं है, तो इससे किसे फायदा होगा? इसकी उपयोगिता ही क्या है?
मौके पर मौजूद बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भी तंज कसते हुए कह दिया कि जब इस सड़क का कोई काम ही नहीं है, तो इसे क्यों बनाया जा रहा है? क्या यह सड़क हड़प्पा की कोई खोज है?
7 करोड़ का प्लांट, 22 करोड़ की सड़क: किसे पहुंचाना था फायदा?
इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे का छुपा हुआ पहलू बड़ा ही दिलचस्प है और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। असल में, 2021 में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के लिए 9.04 करोड़ मंजूर हुए थे और यह काम 7.03 करोड़ में पूरा भी हो गया। अब इस एसटीपी तक नालियों का गंदा पानी ले जाने के लिए 1900 मीटर लंबी और 25 फीट चौड़ी सड़क बना दी गई।
स्थानीय ठेकेदारों की मानें तो अगर सिर्फ 1 मीटर चौड़ी और गहरी आरसीसी नाली बनानी होती, तो मजदूरी और सामग्री मिलाकर 5 करोड़ रुपए से भी कम लागत में काम हो जाता (औसत लागत करीब 10 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर)। लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार के समय, किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए केवल नाली बनाने की बजाय 22.54 करोड़ रुपए का भारी-भरकम सड़क-नाली प्रोजेक्ट मंजूर कर लिया गया। काम अब तक अधूरा है और उपयोगिता किसी को नहीं पता। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी पहले इस अजीबोगरीब प्रोजेक्ट पर आपत्ति जता चुके हैं।
अफसरों ने रटा-रटाया जवाब दिया तो ठेकेदारों को मिली चेतावनी
सवालों में घिरे अफसरों ने मास्टर प्लान का बहाना बनाते हुए कहा कि गंदा पानी एसटीपी तक पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान में इसका प्रावधान था। इसके बाद डिप्टी सीएम ने कोनी कन्वेंशन सेंटर, अशोक नगर, दयालबंद और गांधी चौक का भी राउंड लिया। उन्होंने काम की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताई और ठेकेदार को जल्द से जल्द अधूरे कार्य पूरे करने की सख्त चेतावनी दी।
अब बदलेगी अरपा नदी की तस्वीर, रुकेंगे 70 नाले
निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ने शहर की लाइफलाइन अरपा नदी को लेकर भी बड़ा फैसला लिया। नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए 250 करोड़ 93 लाख रुपए की परियोजना को उन्होंने सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
अब शहर के 70 नालों का गंदा पानी सीधा नदी में नहीं जाएगा। इसके लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान जमीन पर उतरेगा, जिसमें 57 जगहों पर डायवर्जन स्ट्रक्चर, 13 डायवर्जन वियर, 3 सीवरेज पंपिंग स्टेशन और 2 नए एसटीपी बनाए जाएंगे। डिप्टी सीएम साव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नदी पुनरुद्धार का यह काम गुणवत्ता के साथ और तय समय पर हर हाल में पूरा होना चाहिए।
