अब खेतों की पराली नहीं होगी बेकार, कचरे से दौड़ेंगी ऊर्जा की नई परियोजनाएं, किसानों की बढ़ेगी कमाई
बिलासपुर : खेतों में फसल कटाई के बाद बेकार समझकर छोड़ दिए जाने वाले कृषि अवशेष और शहरों में रोजाना निकलने वाला गीला कचरा अब कमाई और ऊर्जा का नया जरिया बनने जा रहा है। बिलासपुर जिले में तखतपुर और सेंदरी में प्रस्तावित दो बायोगैस संयंत्र कचरे को संसाधन में बदलने की तैयारी में हैं। इन प्लांटों से न केवल स्वच्छ ईंधन तैयार होगा, बल्कि किसानों को कृषि अवशेष और गोबर बेचकर अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिलेगा। खास बात यह है कि इन संयंत्रों से निकलने वाली जैविक खाद खेती के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
जिले में वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने इन परियोजनाओं की तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सीबीजी मॉनिटरिंग समिति की बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्लांट शुरू होने के बाद कच्चे माल की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए गांवों से लेकर नगरीय क्षेत्रों तक नियमित आपूर्ति की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।
पराली, गोबर अब किसानों के कमाई का जरिया
फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले कृषि अवशेषों को अक्सर अनुपयोगी मान लिया जाता है। कई बार इन्हें खेतों में ही छोड़ दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है। अब यही अवशेष बायोगैस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल बनेंगे। प्लांटों में पैरा, भूसी और गोबर का इस्तेमाल कर बायोफ्यूल तैयार किया जाएगा। कलेक्टर ने कृषि विभाग को किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने और उन्हें कृषि अवशेषों की आपूर्ति से होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की मंशा है कि किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि कृषि अपशिष्ट को भी आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में इस्तेमाल कर सकें।
तखतपुर में रिलायंस, सेंदरी में बीपीसीएल का प्रोजेक्ट
जिले में दो अलग-अलग मॉडल पर बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। तखतपुर में रिलायंस बायो एनर्जी लिमिटेड का कृषि अपशिष्ट आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उद्योग लगाया जा रहा है। इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 22.5 मीट्रिक टन बताई गई है। इसमें मुख्य रूप से कृषि अवशेष और गोबर का इस्तेमाल होगा।
वही सेंदरी में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का प्लांट प्रस्तावित है। इसके अप्रैल-मई में शुरू होने की संभावना है। यह नगरीय निकायों से निकलने वाले गीले कचरे पर आधारित होगा। संयंत्र में प्रतिदिन लगभग 10 टन गीले कचरे का उपयोग किया जाएगा।
खेतों को मिलेगी जैविक खाद
इन परियोजनाओं का फायदा केवल गैस उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। बायोगैस तैयार करने की प्रक्रिया के बाद जैविक खाद भी मिलेगी। इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और जैविक खेती को प्रोत्साहन देने की संभावना बनेगी। बैठक में इस खाद के उपयोग और बाजार में बिक्री की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई।
विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी
कलेक्टर ने उद्योग विभाग सहित संबंधित विभागों को जरूरी अनुमतियां और आपसी समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग किसानों को कच्चा माल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाएगा, वहीं नगरीय निकायों से सेंदरी प्लांट तक गीले कचरे की नियमित आपूर्ति की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। सीबीजी मॉनिटरिंग समिति की बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधि, बायो ऊर्जा उद्यमी और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
