न्याय नहीं तो इलाज नहीं? रायपुर डेंटल कॉलेज में हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप, देखे वीडियो

न्याय नहीं तो इलाज नहीं? रायपुर डेंटल कॉलेज में हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप, देखे वीडियो

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज में डेंटल पोस्टग्रेजुएट छात्रों और इंटर्न्स का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। बीते कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे प्रदर्शन के बाद अब छात्रों ने कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला बंदी कर दी है। इसके चलते मरीजों, डॉक्टरों और कॉलेज स्टाफ किसी को भी परिसर के भीतर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

छात्रों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, मेडिकल PG छात्रों के बराबर स्टाइपेंड पैरिटी, रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट से वेतन संशोधन, गर्ल्स हॉस्टल की बेहतर सुविधाएं, और कॉलेज के बुनियादी व क्लिनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार शामिल हैं।

छात्रों का कहना है कि डेंटल PG और इंटर्न्स को मेडिकल PG की तुलना में बेहद कम स्टाइपेंड मिलता है, जो न सिर्फ आर्थिक असमानता है बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और प्रोफेशनल ग्रोथ पर भी गहरा असर डालता है।

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आंदोलन का अनोखा और रचनात्मक स्वरूप

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पिछले तीन दिनों से छात्र सिर्फ नारेबाजी नहीं, बल्कि रचनात्मक तरीकों से अपनी बात रख रहे हैं।

  • Signature Wall के ज़रिए डेंटल इक्वलिटी के समर्थन में हस्ताक्षर
  • 5 सेकंड वीडियो मैसेज अभियान
  • नुक्कड़ नाटक और OPD हेल्प डेस्क
  • Demand Status Tracker
  • White Coat Exhibition – “The Cost of Becoming a Doctor”, जिसमें डॉक्टर बनने की असल कीमत, मानसिक दबाव, हॉस्टल की कमी और सिस्टम की खामियों को उजागर किया गया

छात्रों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपते हुए शीघ्र लिखित आदेश और समयबद्ध समाधान की मांग की है। छात्रों ने साफ कहा है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्वक लेकिन मजबूती से जारी रहेगा।

अब हालात गंभीर
मांगों पर सुनवाई न होने से नाराज़ UG और PG छात्रों ने अब कॉलेज गेट पर ताला बंदी कर दी है, जिससे कॉलेज की सामान्य व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों ने मीडिया और प्रशासन से अपील की है कि इस न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन को गंभीरता से लिया जाए, ताकि छात्रों को उनका हक मिल सके और भविष्य में मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

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