फ़ोन पर ‘फ्री फायर’ का आखिरी गेम, एक किशोर की मौत, दूसरा जिंदगी के लिए लड़ रहा जंग

फ़ोन पर ‘फ्री फायर’ का आखिरी गेम, एक किशोर की मौत, दूसरा जिंदगी के लिए लड़ रहा जंग

सक्ती : रात के समय आसपास के गणेश पंडालों में चहल-पहल थी, लेकिन इसी बीच रेल पटरी पर बैठे कुछ किशोर मोबाइल की दुनिया में पूरी तरह खोए हुए थे। किशोर फ्री फायर गेम में इतना खो गये कि सामने से मालगाड़ी कब करीब आ गई, इसका उन्हें पता ही नहीं चला। कुछ सेकंड में 14 साल के टिकेश साहू की जिंदगी भी खेल के साथ ही खत्म हो गई।

मामला सक्ती जिले के ग्राम सकरेलीभाठा का है। मंगलवार रात करीब 8 बजे 14 वर्षीय टिकेश साहू अपने साथी नवीन खांडे के साथ रेलवे पटरी पर बैठकर मोबाइल में गेम खेल रहा था। दोनों गेम में इस कदर खो गये थे कि बाराद्वार की ओर से आ रही मालगाड़ी की आवाज उन तक नहीं पहुंची। जब तक उन्हें खतरे का एहसास होता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

घटना स्थल में मच गई चीख-पुकार

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मालगाड़ी की चपेट में आने से टिकेश की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में नवीन के सिर, कंधे और पैर में गंभीर चोटें आई। घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घायल नवीन को तत्काल बाराद्वार अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे चांपा रेफर कर दिया।

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रोज पटरी पर जुटता था किशोरों का झुंड

हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बताया कि मोहल्ले के करीब आधा दर्जन किशोरों के लिए रेलवे पटरी के आसपास बैठकर मोबाइल गेम खेलना रोज की आदत बन गई थी। गणेश पंडाल से कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद किशोर पटरी के खतरे को नजरअंदाज कर रहे थे।

हादसे से 15 मिनट पहले बदली दो दोस्तों की किस्मत

बताया जा रहा हैं कि घटना से करीब 15 मिनट पहले चार दोस्त इसी जगह के आसपास बैठकर मोबाइल गेम खेल रहे थे। इनमें से दो दोस्त उठकर गणेश पंडाल में प्रसाद लेने चले गए। कुछ देर बाद पटरी पर बैठे किशोरों को मालगाड़ी ने अपनी चपेट में ले लिया। अगर वे दोनों दोस्त उस वक्त वहीं बैठे रहते, तो हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी।

मोबाइल गेम से ज्यादा खतरनाक थी खेल की जगह

रेलवे पटरी कोई खेल का मैदान नहीं है। तेज रफ्तार ट्रेन या मालगाड़ी को नजदीक आने तक सुन पाना कई बार संभव नहीं होता। सकरेलीभाठा की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उन किशोरों और उनके परिवारों के लिए बड़ा सबक है, जो मोबाइल में इतने डूब जाते हैं कि आसपास का वास्तविक खतरा दिखाई ही नहीं देता।

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