Name Plate Vastu: लकड़ी, मेटल या पत्थर… घर के मुख्य द्वार पर कौन सी नेम प्लेट लगाना माना जाता है शुभ?
Name Plate Vastu: घर की खूबसूरती में मुख्य दरवाजे का अहम योगदान होता है। यही वजह है कि लोग दरवाजे के रंग, सजावट और डिजाइन के साथ-साथ नेम प्लेट पर भी खास ध्यान देते हैं। वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और इससे जुड़ी कई चीजों को शुभ-अशुभ मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है।
अगर आप भी अपने घर के दरवाजे पर नई नेम प्लेट लगवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो उसके मटेरियल, रंग, आकार और दिशा को लेकर कई सवाल मन में आ सकते हैं। लकड़ी, मेटल और पत्थर तीनों तरह की नेम प्लेट बाजार में आसानी से मिल जाती हैं। वास्तु की मान्यताओं के अनुसार इनका चुनाव घर के मुख्य द्वार की दिशा और वहां के तत्वों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
लकड़ी की नेम प्लेट क्यों मानी जाती है शुभ?
वास्तु की मान्यताओं में लकड़ी को प्राकृतिक तत्व से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसी कारण लकड़ी की नेम प्लेट को कई लोग घर के मुख्य द्वार के लिए सकारात्मक विकल्प मानते हैं। लकड़ी की नेम प्लेट घर के प्रवेश द्वार को गर्मजोशी और प्राकृतिक लुक भी देती है। वास्तु मान्यताओं को मानने वाले लोग इसे विशेष रूप से कुछ दिशाओं के साथ अनुकूल मानते हैं। हालांकि, केवल लकड़ी की नेम प्लेट लगा देने से किसी तरह का निश्चित वास्तु लाभ होता है, इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
मेटल की नेम प्लेट कब चुनें?
मेटल यानी धातु से बनी नेम प्लेट मजबूत और टिकाऊ होने के साथ आधुनिक लुक भी देती है। वास्तु परंपराओं में धातु को भी विशेष महत्व दिया जाता है, लेकिन अलग-अलग दिशाओं के लिए अलग धातु या रंग को अनुकूल माना जा सकता है। इसलिए अगर आप मेटल नेम प्लेट लगाना चाहते हैं तो केवल डिजाइन पसंद आने के आधार पर फैसला लेने के बजाय मुख्य द्वार की दिशा और अपनी वास्तु मान्यता को ध्यान में रख सकते हैं।
पत्थर की नेम प्लेट कैसी मानी जाती है?
पत्थर को आमतौर पर मजबूती और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से पत्थर से बनी नेम प्लेट भी कई घरों के मुख्य द्वार पर देखने को मिलती है। वास्तु मान्यताओं में पत्थर को स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। अगर आप पत्थर की नेम प्लेट चुन रहे हैं, तो उसका रंग, आकार और वजन जरूर देखें। मुख्य दरवाजे के लिए बहुत भारी या जरूरत से ज्यादा बड़ी प्लेट चुनने के बजाय दरवाजे के आकार के अनुरूप डिजाइन बेहतर रहेगा।
नेम प्लेट लगाते समय दिशा का रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार नेम प्लेट के मटेरियल से ज्यादा महत्वपूर्ण मुख्य द्वार की दिशा को भी माना जाता है। अलग-अलग दिशाओं के लिए अलग रंग और सामग्री को अनुकूल माना जाता है। नेम प्लेट ऐसी जगह लगाना बेहतर है जहां वह आसानी से दिखाई दे। उस पर नाम साफ और स्पष्ट लिखा होना चाहिए। बहुत नीचे, अत्यधिक ऊंचाई पर या ऐसी जगह लगाने से बचें जहां नाम पढ़ना मुश्किल हो।
रंग और डिजाइन का भी है महत्व
नेम प्लेट खरीदते समय सिर्फ मटेरियल पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उसका रंग और डिजाइन भी घर के मुख्य द्वार के साथ मेल खाना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में अलग-अलग दिशाओं के लिए अलग रंगों को शुभ माना जाता है। इसलिए वास्तु का पालन करने वाले लोग दरवाजे की दिशा के अनुसार नेम प्लेट का रंग चुनते हैं। इसके अलावा नेम प्लेट को हमेशा साफ-सुथरा और अच्छी स्थिति में रखना चाहिए। टूटी हुई, जंग लगी या धुंधली नेम प्लेट घर के प्रवेश द्वार की खूबसूरती खराब कर सकती है।
लकड़ी, मेटल या पत्थर, कौन सी सबसे शुभ?
वास्तु की मान्यताओं के अनुसार हर घर के लिए एक ही मटेरियल को सबसे शुभ नहीं माना जा सकता। नेम प्लेट का चुनाव मुख्य द्वार की दिशा, रंग, डिजाइन और घर की अन्य वास्तु मान्यताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। अगर आप सिर्फ सुंदरता और टिकाऊपन के आधार पर चुनाव कर रहे हैं तो मौसम, रखरखाव और दरवाजे के डिजाइन को भी ध्यान में रखें। वहीं वास्तु को महत्व देने वाले लोग दिशा और मटेरियल के पारंपरिक संबंधों को ध्यान में रख सकते हैं।
छोटी-सी बात, जो नेम प्लेट को बनाएगी बेहतर
नेम प्लेट चाहे लकड़ी की हो, मेटल की या पत्थर की, उसका नाम स्पष्ट होना, प्लेट का साफ रहना और दरवाजे के डिजाइन के साथ उसका संतुलित दिखना सबसे जरूरी है। वास्तु संबंधी मान्यताओं को अपनाते समय इन्हें परंपरागत विश्वास के रूप में ही देखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र की प्रचलित मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। वास्तु से जुड़े दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अलग-अलग वास्तु परंपराओं में नियम और मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं। नेशनल जगत विजन इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है।
