Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की सड़कों पर 45 लाख बिना बीमा वाली गाड़ियां! सबसे ज्यादा दोपहिया, हादसे में भारी पड़ सकती है लापरवाही
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लाखों वाहन मालिक बीमा रिन्यूअल को लेकर गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं। राज्य में पंजीकृत करीब 96 लाख वाहनों में से 45 लाख से अधिक गाड़ियां बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें सबसे बड़ी संख्या दोपहिया वाहनों की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा समाप्त होने के बावजूद वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि किसी भी सड़क दुर्घटना की स्थिति में वाहन मालिक को भारी आर्थिक और कानूनी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
देशभर में 16.5 करोड़ से ज्यादा वाहन बिना बीमा
राष्ट्रीय वाहन डेटाबेस के अनुसार, देशभर में करीब 16.5 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। यह कुल पंजीकृत वाहनों का लगभग 44 से 54 प्रतिशत हिस्सा है। इसी बढ़ती लापरवाही को देखते हुए केंद्र सरकार ने नई गाड़ियों की बिक्री के नियमों में बदलाव किया है। अब नई गाड़ी खरीदने पर चार साल का बीमा पैकेज अनिवार्य किया गया है, जिसमें पहले वर्ष फर्स्ट पार्टी और अगले तीन वर्षों का थर्ड पार्टी बीमा शामिल होता है।
बीमा नहीं तो हादसे में खुद उठाना पड़ सकता है पूरा खर्च
बीमा समाप्त होने के बाद यदि वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाए, चोरी हो जाए या प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त हो जाए, तो वाहन मालिक को बीमा क्लेम का लाभ नहीं मिल पाता। यदि वाहन के पास थर्ड पार्टी बीमा नहीं है और उससे किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचता है, तो मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी वाहन मालिक पर आ जाती है। वहीं फर्स्ट पार्टी बीमा वाहन को हुए नुकसान की भरपाई में मदद करता है।
बिना बीमा वाहन चलाने पर जुर्माना और सजा दोनों
मोटर वाहन कानून के तहत सड़क पर चलने वाले हर वाहन के लिए कम से कम थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है।
- नियमों के अनुसार पहली बार बिना बीमा पकड़े जाने पर 2,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- दोबारा उल्लंघन करने पर 10,000 तक जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान है।
- कई मामलों में दोपहिया वाहन चालकों पर तीन महीने तक की सजा और अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
टोल प्लाजा और मोबाइल ऐप से हो रही निगरानी
अब बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान करना पहले से कहीं आसान हो गया है। टोल प्लाजा पर गुजरने वाले वाहनों का रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम से जांचा जाता है। अगर किसी वाहन का बीमा समाप्त पाया जाता है तो उसका ई-चालान जारी कर वाहन मालिक को तत्काल सूचना भेज दी जाती है। इसके अलावा परिवहन विभाग के मोबाइल एप के जरिए वाहन का बीमा, फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेज कुछ ही सेकंड में जांचे जा सकते हैं।
अपर परिवहन आयुक्त की सलाह
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे केवल कार्रवाई से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए फर्स्ट पार्टी और थर्ड पार्टी दोनों प्रकार का बीमा समय पर रिन्यू कराएं। उनका कहना है कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था के कारण बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
समय रहते कराएं बीमा रिन्यूअल
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ हजार रुपये बचाने के चक्कर में लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को बीमा समाप्त होने से पहले ही ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से उसका रिन्यूअल करा लेना चाहिए। इससे न केवल कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकेगा, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
