हसदेव अरण्य के जंगल में पेड़ों की कटाई हुआ शुरू, एक हजार से ज्यादा जवान तैनात, डेढ़ दर्जन लोगों को पुलिस ने घरों से उठाया……..
अडानी को दिया गया हसदेव क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए मंगलवार सुबह एक हजार से अधिक पुलिस बल की तैनाती कर प्रशासन और वन विभा

हसदेव अरण्य के जंगल में पेड़ों की कटाई हुआ शुरू, एक हजार से ज्यादा जवान तैनात, डेढ़ दर्जन लोगों को पुलिस ने घरों से उठाया……..अडानी को दिया गया हसदेव क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए मंगलवार सुबह एक हजार से अधिक पुलिस बल की तैनाती कर प्रशासन और वन विभा

हसदेव अरण्य के जंगल में पेड़ों की कटाई हुआ शुरू, एक हजार से ज्यादा जवान तैनात, डेढ़ दर्जन लोगों को पुलिस ने घरों से उठाया……..अडानी को दिया गया हसदेव क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए मंगलवार सुबह एक हजार से अधिक पुलिस बल की तैनाती कर प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को तैनात कर […]

हसदेव अरण्य के जंगल में पेड़ों की कटाई हुआ शुरू, एक हजार से ज्यादा जवान तैनात, डेढ़ दर्जन लोगों को पुलिस ने घरों से उठाया……..
अडानी को दिया गया हसदेव क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए मंगलवार सुबह एक हजार से अधिक पुलिस बल की तैनाती कर प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को तैनात कर दिया गया…….

उत्तरी छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए मंगलवार सुबह एक हजार से अधिक पुलिस बल की तैनाती कर प्रशासन और वन विभाग के अमले ने पेड़ों की कटाई शुरू करा दिया है। पेड़ों की कटाई और कोयला खदान खोलने का विरोध ग्रामीण वर्षों से करते आ रहे हैं।

एक साल से अधिक समय से ग्रामीणों धरने पर बैठे हैं। राजनैतिक बयानबाजी के बीच मंगलवार तड़के पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले ग्रामीणों के नेतृत्वकर्ताओं को पुलिस ने घरों से उठा लिया है। 4 गांवों को घेरकर जंगल में कड़ी सुरक्षा के बीच घाटबर्रा क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शुरू कर दिया गया है। इतनी ज्यादा पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था है कि मौके पर विरोध करने वाले ग्रामीण भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। पुलिस ने आसपास के इलाके को छावनी बना दिया है। पेड़ कटाई को लेकर पुलिस प्रशासन और गांव के आदिवासियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।कभी भी कुछ भी अप्रिय स्थिति निर्मित हो सकती है।

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बता दें कि राजस्थान विद्युत निगम लिमिटेड को आवंटित परसा-केते कोल ब्लॉक के दूसरे चरण में परसा ईस्ट केते बासेन एक्सटेंशन खदान के लिए स्वीकृति वर्ष 2012-13 में दी गई थी। वर्ष 2019 में फारेस्ट क्लीयरेंस दिया गया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के रायपुर आने के बाद भूपेश सरकार ने इस खदान के लिए एनओसी दे दी है। इस कोयले की खुदाई से लेकर बाकी सभी कार्य अडानी की कंपनी को मिला है।परसा ईस्ट केते बासेन परियोजना में कुल चार गांवों परसा, हरिहरपुर, घाटबर्रा एवं फतेहपुर की निजी और राजस्व की जमीनों के साथ ही वनभूमि को मिलकार 2711 हेक्टेयर भूमि पर शामिल है। खदान के विस्तार से घाटबर्रा गांव को पूरी तरह से विस्थापित किया जाएगा।

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सुबह होने से पहले विरोध करने वाले हिरासत में

ग्रामीणों के मुताबिक पुलिस ने मंगलवार को सुबह होने से पहले ही खदान के विरोध में आंदोलन कर रहे डेढ़ दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया है। इनमें घाटबर्रा सरपंच जयनंदन सिंह पोर्ते, पतुरियाडांड सरपंच उमेश्वर सिंह अर्मो, बासेन सरपंच श्रीपाल सिंह, साल्ही के ठाकुरराम कुसरो, आनंद कुमार कुसरो, पुटा के जगरनाथ बड़ा, राम सिंह मरकाम, बासेन के श्याम लाल शिव प्रसाद सहित अन्य ग्रामीण नेता शामिल हैं जो वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे। यहां करीब 10 दिनों पूर्व भी पेड़ों की कटाई के लिए फोर्स लगाई गई थी, लेकिन तब मुख्यमंत्री तक बात पहुंचाई गई और फोर्स को हटा लिया गया।

फोर्स की मौजूदगी में काटे जाएंगे 45 हेक्टेयर में पेड़

सरगुजा कलेक्टर कुंदन कुमार ने कहा कि पेड़ों की कटाई वनविभाग द्वारा कराई जा रही है। अभी 45 हेक्टेयर के जंगल काटे जाएंगे। उसके बाद 1100 हेक्टेयर का एक और जंगल काटा जाएगा। घाटबर्रा में खनन 3 साल बाद होना है। प्रशासन ने पेड़ों की कटाई के लिए प्रभावित 4 गांवों फतेहपुर, हरिहरपुर, घाटबर्रा और परसा इलाके में करीब एक हजार से ज्यादा पुलिस बल लगाकर क्षेत्र को छावनी बना दिया है। यहां जंगल के इलाके मे लोगों को जाने की मनाही है। इस कारण विरोध करने वाले नहीं पहुंच पा रहे हैं। मीडिया को भी जंगल में जाने नहीं दिया जा रहा है।

4 गांवों और जंगल की जमीन, 2 लाख पेड़ काटे जाएंगे

राजस्थान के विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित परसा कोल ब्लाक के डेवलेपमेंट एवं माइनिंग का ठेका अडानी इंटरप्राइसेस के हाथों में है। पहले चरण में परसा कोल ब्लॉक में 841 हेक्टेयर जंगल की भूमि से पेड़ों की कटाई की गई थी। दूसरे चरण में परसा ईस्ट-केते-बासेन कोल ब्लॉक में कुल 2711 हेक्टेयर क्षेत्र में कोल उत्खनन की मंजूरी दी गई थी। इसमें 1898 हेक्टेयर भूमि वनक्षेत्र है, जिसमें परसा, हरिहरपुर, फतेहपुर और घाटबर्रा के 750 परिवारों को विस्थापित करने का प्रस्ताव है। अनुमान के मुताबिक पीकेईबी में 2 लाख पेड़ काटे जाएंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था-बाबा नहीं चाहेंगे तो नहीं कटेगी एक भी डंगाल

पीकेईबी खदान के विरोध का समर्थन करते हुए मंत्री टीएस सिंहदेव ने ग्रामीणों के समक्ष कहा था कि गोली चली तो पहली गोली मुझे लगेगी। मंत्री के इस बयान के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि बाबा साहब (टीएस सिंहदेव) का ब्यान आया है कि पहली गोली मुझे लगेगी। गोली चलने की नौबत ही नहीं आएगी, जो गोली चलाएगा पहले उन पर ही गोली चल जाएगी। सीएम बघेल ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि बाबा नहीं चाहेंगे तो पेड़ तो क्या एक डंगाल भी नहीं कटेगी। 4 दिनों पूर्व ही टीएस सिंहदेव ने बयान दिया था कि हसदेव क्षेत्र में नई खदानें नहीं खुलेंगी। अब सरकार के संरक्षण में ही पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है।

जब बाबा नहीं चाह रहे हैं तो कैसे शुरू हो गई पेड़ों की कटाई, कहां गया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा किया गया वादा, क्या सिर्फ आदिवासी ग्रामीणों को बेवकुफ बनाने के लिए कहा गया था , मुख्यमंत्री को सामने आकर जवाब देना चाहिए और कटाई को तत्काल रोकना चाहिए , ऐसा क्या हो गया जो तत्काल कटाई शुरू करानी पड़ गई,सही में तो यह नही है की सुप्रीम कोर्ट में चल रही नान घोटाले की सुनवाई से इसका संबंध तो नहीं है । छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाह रही है।

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