Russia Job Trap: नौकरी के लिए रूस गए उत्तराखंड के दो भाई लापता? 20 दिन से नहीं हुआ संपर्क, परिवार ने बंधक बनाए जाने का लगाया आरोप
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। रोजगार के लिए रूस गए दो सगे भाइयों से पिछले 20 दिनों से परिवार का कोई संपर्क नहीं हो पाया है। परिजनों का आरोप है कि दोनों भाइयों को विदेश में बंधक बनाकर उनकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जा रहा है। परिवार का यह भी दावा है कि उनके पासपोर्ट और वीजा कथित तौर पर अपने कब्जे में रख लिए गए हैं, जिसके कारण वे वापस भारत नहीं लौट पा रहे हैं। मामले ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है।
रोजगार का सपना, मुश्किलों में बदली जिंदगी
जानकारी के अनुसार, धारचूला के कालिका गांव निवासी भूपेंद्र सिंह कार्की और उनके भाई आनंद सिंह कार्की रोजगार के लिए रूस गए थे। परिजनों का आरोप है कि विदेश भेजने के नाम पर उनसे करीब 8 लाख रुपये लिए गए। रूस पहुंचने के बाद दोनों भाइयों को स्थानीय सिम कार्ड तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उनका परिवार से संपर्क बेहद सीमित हो गया।
20 दिनों से नहीं आई कोई खबर
भूपेंद्र सिंह कार्की की पत्नी तनुजा कार्की ने बताया कि शुरुआती दिनों में दोनों भाइयों से इंटरनेट कॉल के जरिए बातचीत हो जाती थी, लेकिन पिछले करीब 20 दिनों से कोई संपर्क नहीं हुआ है। लगातार संपर्क टूटने से परिवार गहरी चिंता में है और उनकी सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। परिवार के अनुसार, इस तनाव का असर घर के बुजुर्गों पर भी पड़ा है। तनुजा का कहना है कि चिंता के कारण उनके ससुर को हार्ट अटैक आया, जबकि वह स्वयं नौ माह की गर्भवती हैं और तीन वर्षीय बच्चे के साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
मामले को लेकर परिजनों ने उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात कर दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी की मांग की। ऐरी ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है और आवश्यकता पड़ने पर मामले को विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाने की बात कही है।
सरकारी स्तर पर मदद की उम्मीद
फिलहाल, परिवार प्रशासन और सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते दोनों भाइयों का पता नहीं लगाया गया तो उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी एजेंसियां और भारतीय दूतावास इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
