सावन का पहला सोमवार: काशी में मंगला आरती से शुरुआत, महाकाल में भस्म आरती; बैद्यनाथ धाम में उमड़े 3 लाख भक्त
सावन के पहले सोमवार पर आज पूरा देश शिवभक्ति में डूबा नजर आ रहा है। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही शिवालयों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं। गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, वाराणसी के काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर से लेकर झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी हैं। लोग गंगाजल, दूध और बेलपत्र से भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। शिवालयों में विभिन्न राज्यों से आए कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला भी अनवरत जारी है।
काशी और महाकाल: तड़के से ही शुरू हुआ दर्शन-पूजन
मोक्ष की नगरी वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पट भव्य मंगला आरती के साथ खुले। हजारों की संख्या में पहुंचे शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक रोशनी से भव्य स्वरूप दिया गया है। लोग धतूरा, पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
वहीं, मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी अलसुबह विशेष पूजा-अर्चना हुई। तड़के भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का रुद्राभिषेक कर उनका आलौकिक श्रृंगार किया गया। यहां दर्शन के लिए लोग देर रात से ही लाइनों में लग गए थे। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए दर्शन की विशेष व्यवस्था की है।
देवघर में जनसैलाब, सोमनाथ में गूंजे मंत्र
झारखंड के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में आज आस्था का बड़ा जनसैलाब उमड़ पड़ा है। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि दिनभर में करीब दो से तीन लाख लोग यहां दर्शन करेंगे। देवघर के एसपी प्रवीण पुष्कर के अनुसार, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। रात से ही पुलिस, ट्रैफिक जवान और क्यूआरटी (QRT) की टीमें अपनी-अपनी जगह पर मुस्तैद हैं ताकि किसी को परेशानी न हो।
इधर, गुजरात में अरब सागर के तट पर स्थापित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में भी सुबह से दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक का दौर जारी है। पूरा मंदिर परिसर शिव भजनों और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान है। ओडिशा के पुरी स्थित लोकनाथ मंदिर में भी दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में भी तांता
राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक गौरी शंकर मंदिर में दर्शन के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े रहे। मंदिर के अंदर और बाहर सिर्फ 'बम-बम भोले' की गूंज सुनाई दे रही है जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। इसके अलावा देश भर के अन्य शिवालयों में भी कांवड़ियों का जत्था गंगाजल लेकर पहुंच रहा है। जगह-जगह कांवड़ियों के लिए भंडारे लगाए गए हैं और विश्राम, चिकित्सा तथा पेयजल का इंतजाम किया गया है।
सोमवार की महिमा और सुरक्षा इंतजाम
सनातन परंपरा में सावन महीने को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए इसी माह में कठोर तपस्या की थी। सोमवार के व्रत और शिवलिंग पर जल अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' जपने से मनोकामनाएं पूरी होने की आस्था है।
लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सभी प्रमुख मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी हो रही है और बैरिकेडिंग के साथ-साथ कंट्रोल रूम व एम्बुलेंस भी मौके पर मौजूद हैं, जिससे दर्शन व्यवस्था बिना किसी रुकावट के सुचारु रूप से चलती रहे। मंदिर परिसरों में यह तस्वीरें बता रही हैं कि सदियों बाद भी भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था वैसी ही बनी हुई है।
