मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत तो बनी जांच कमेटी, गड़बड़ी भी सामने आई लेकिन कार्रवाई के आंकड़े ने ही खड़े कर दिए नए सवाल
गरियाबंद। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए जारी होने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल को लेकर गरियाबंद जिले में एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। मुड़ागांव पंचायत में 15वें वित्त की राशि से कराए गए सड़क सौंदर्यीकरण, सफाई और बोरवेल जैसे कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि लाखों रुपये के खर्च से जुड़े दस्तावेज और मौके की स्थिति में कई विसंगतियां मिलीं, लेकिन जांच के बाद जितनी राशि की वसूली तय की गई, वह कथित अनियमितता के मुकाबले काफी कम है।
मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद जांच टीम गठित की गई थी। जांच में वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ी कुछ राशि की रिकवरी तय होने की बात सामने आई, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए कई साक्ष्यों और मौके पर सामने आई कथित अनियमितताओं को पर्याप्त जगह नहीं दी गई।
15वें वित्त की राशि के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल
शिकायतकर्ता और भाजयुमो के तत्कालीन जिला अध्यक्ष हेमंत नागेश के अनुसार, पंचायत में 15वें वित्त की राशि से अलग-अलग विकास कार्यों के नाम पर 25 लाख रुपये से अधिक का आहरण किया गया। आरोप है कि सड़क सौंदर्यीकरण, सफाई और बोरवेल से संबंधित भुगतान में ऐसे बिलों का इस्तेमाल किया गया, जिनकी वैधता और उपयोगिता पर सवाल उठते हैं। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि एक ही सड़क के सौंदर्यीकरण को अलग-अलग मद में दोबारा दर्शाकर भुगतान कराया गया। उन्होंने जांच टीम के सामने अपने आरोपों के समर्थन में 128 दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात कही है।
जांच हुई, लेकिन कार्रवाई के आंकड़े ने खड़े किए सवाल
मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों की टीम ने मामले की जांच की और मौके का भौतिक सत्यापन भी किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के दौरान कई आरोप सही पाए गए, लेकिन अंतिम रिपोर्ट में कथित गड़बड़ियों का पूरा उल्लेख नहीं किया गया। जांच के बाद सरपंच और सचिव से करीब 3.22 लाख रुपये की रिकवरी निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के मुकाबले बड़ी रकम का लेनदेन हुआ था, तो फिर जिम्मेदारी और वसूली की कार्रवाई सीमित क्यों रही।
तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में
मामले में शिकायतकर्ता ने भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों का मूल्यांकन तकनीकी सहायक के स्तर से किया गया, जबकि बिल और भुगतान संबंधी प्रक्रिया में पंचायत सचिव की भूमिका रही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस अधिकारी के स्तर से पूर्व में कार्यों की स्थापना या प्रक्रिया जुड़ी थी, उसी अधिकारी को जांच टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। इसी वजह से वह जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सिर्फ मुड़ागांव ही नहीं, अन्य पंचायतों की शिकायतों पर भी सवाल
मुख्यमंत्री पोर्टल के जरिए ब्लॉक की अन्य पंचायतों को लेकर भी शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। कुम्हड़ाई खुर्द में सीसी रोड निर्माण में कथित अनियमितता, कुल्हाड़ी कला में करीब 6.57 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी, मोखागुड़ा में मनरेगा कार्यों से जुड़ी शिकायत और करलागुड़ा में मजदूरों की जगह जेसीबी से काम कराने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन मामलों में भी उन्होंने दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए, लेकिन जांच के बाद जिस तरह से मामलों का निराकरण किया गया, उससे वे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि शिकायतों की गंभीरता के अनुरूप जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रशासन बोला- असंतुष्ट हैं तो दोबारा करा सकते हैं जांच
मामले को लेकर देवभोग जनपद पंचायत के सीईओ जगेंद्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री पोर्टल से प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाती है। यदि कोई शिकायतकर्ता जांच के निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं है तो वह जिला पंचायत अथवा कलेक्टर के समक्ष दोबारा जांच का अनुरोध कर सकता है। फिलहाल, मुड़ागांव समेत अन्य पंचायतों में लगाए गए आरोपों और जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद बना हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि उच्च स्तर पर दोबारा जांच होती है या नहीं और यदि अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
