नगर निगम के कागजों में ही ढंक गया नाला, हकीकत ये की इसी में डूब के 4 साल के काव्यांश की चली गई जान

नगर निगम के कागजों में ही ढंक गया नाला, हकीकत ये की इसी में डूब के 4 साल के काव्यांश की चली गई जान

रायपुर. नगर निगम के दफ्तरों में फाइलें कितनी तेजी से दौड़ती हैं और जमीन पर काम कितना सुस्त है, इसका ज्वलंत उदाहरण अमलीडीह की गली नंबर-5 है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड-52 में 4 फीट गहरे खुले नाले ने सोमवार को चार साल के मासूम काव्यांश की जान ले ली। खेलते समय बच्चा इस 3 फीट चौड़े नाले में गिरा और बहकर बड़े नाले में समा गया। 

शिकायतें हुईं, प्रस्ताव बने, फिर सब भूल गए सोचने वाली बात यह है कि इस नाले को लेकर मोहल्ले वाले कई बार गुहार लगा चुके थे। राज्य सरकार के सुशासन तिहार से लेकर जनसमस्या निवारण शिविर तक में इस खुले नाले का रोना रोया गया। स्थानीय पार्षद विनय निर्मलकर ने तो बाकायदा सामान्य सभा की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। रस्म अदायगी के लिए निगम ने निर्माण का प्रस्ताव भी बना लिया, लेकिन फिर वह फाइल ठंडे बस्ते के हवाले कर दी गई। नतीजा, एक परिवार का बच्चा इस लापरवाही की भेंट चढ़ गया।

बजट करोड़ों का, पर शहर के नाले आज भी खुले

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निगम के सालाना बजट के आंकड़े देखें तो आंखें चौंधिया जाएं। छोटी नालियों को ढंकने के लिए 2026-27 के बजट में 1 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। इससे पहले 2021-22 में 'भूमिगत नाली योजना' के नाम पर 475 करोड़ रुपए का भारी-भरकम आंकड़ा कागजों में दिखाया गया था। इसके बाद के सालों में भी कभी 50 लाख तो कभी 1 करोड़ रुपए मरम्मत और सफाई के नाम पर रखे गए। इस साल भी सीवरेज सिस्टम निर्माण के लिए 50 करोड़ का नया प्रस्ताव लाया गया है। करोड़ों के इन बड़े-बड़े दावों के बीच शहर के ज्यादातर नाले बिना कवर के ही मुंह बाए खड़े हैं।

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बारिश में सड़क बन जाती है तालाब

अमलीडीह की जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां 500 मीटर लंबा नाला पूरी तरह कच्चा है। पानी की निकासी ठीक से नहीं होने के कारण हर बारिश में सड़क पर 3 से 4 फीट तक पानी भर जाता है। स्थानीय लोग सालों से इसके समाधान की मांग कर रहे हैं। निगम का अपना एक रटा-रटाया जवाब है कि इसे कवर करने टेंडर तो हुआ था, पर ठेकेदार ने काम नहीं किया। पिछली परिषद में नालों को कवर्ड करने का प्रस्ताव भी आया था, जिस पर आज तक अमल नहीं हुआ।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

 मौजूदा महापौर मीनल चौबे इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बड़े नालों को कवर करने के लिए नई प्लानिंग की बात कह रही हैं।

सबसे हैरान करने वाला बयान नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा का है। उनका कहना है कि शहर के नाले-नालियां कवर्ड हों, ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। हालांकि अब वे भी जलभराव रोकने और हादसों से बचने के लिए प्लानिंग करने की  बात कह रहे हैं।

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