सिंघानिया बिल्डकॉन को रेरा का तगड़ा झटका: हर्षित नियो सिटी विवाद में आया बड़ा फैसला, बिल्डर को तत्काल सिंकिंग फंड और कॉमन एरिया सौंपने का आदेश
रायपुर: राजधानी रायपुर से लगे अमलेश्वर स्थित हर्षित नियो सिटी में लंबे समय से चल रहे विवाद पर आखिरकार छत्तीसगढ़ रेरा ने अपना फैसला सुना दिया है। नामी बिल्डर सिंघानिया बिल्डकॉन की मनमानी के खिलाफ रेरा अध्यक्ष संजय शुक्ला ने सख्त आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत बिल्डर को अब सिंकिंग फंड की पूरी रकम और कॉमन एरिया का प्रबंधन तत्काल वहां की सहकारी आवासीय सोसायटी को हैंडओवर करना होगा। रेरा के इस फैसले से हर्षित नियो सिटी के लोगों और उनकी समिति को लंबे समय से चल रहे विवाद में एक बड़ी राहत मिली है।
रहवासियों ने लगाए थे गंभीर आरोप
दरअसल, हर्षित नियो सिटी रेसीडेंशियल को-ऑपरेटिव सोसायटी मर्यादित ने परियोजना के प्रमोटर सिंघानिया बिल्डकॉन प्रालि और मेसर्स हर्षित सिंघानिया बिल्डकॉन के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। सोसायटी ने अपनी शिकायत में कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। रहवासियों का सीधा आरोप था कि बिल्डर द्वारा कॉलोनी का मेंटेनेंस ठीक तरीके से नहीं किया जा रहा है। साझा सुविधाओं (कॉमन फैसिलिटी) के संचालन में जमकर अनियमितता बरती जा रही है।
सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि बिल्डर ने फ्लैट मालिकों से लिए गए सिंकिंग फंड की एक बड़ी रकम अपने पास दबा रखी है और समिति को ट्रांसफर नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट पूरा होने के बावजूद कॉमन एरिया को भी सोसायटी के सुपुर्द नहीं किया गया था।
रेरा का सख्त आदेश- तुरंत खाते में डालें रकम
रेरा में इस मामले की लगातार सुनवाई हुई। इसके बाद अध्यक्ष संजय शुक्ला ने रहवासियों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि प्रमोटर तत्काल प्रभाव से फ्लैट मालिकों से ली गई सिंकिंग फंड की पूरी रकम सोसायटी के खाते में ट्रांसफर करे। इस फंड का उपयोग समिति अपने दीर्घकालिक रखरखाव, मरम्मत और संरचनात्मक संरक्षण के लिए करेगी। इसके अलावा, रेरा अधिनियम के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा होते ही कॉमन एरिया का मालिकाना हक सोसायटी को सौंपना बिल्डर का वैधानिक दायित्व है, जिसे बिल्डर को तुरंत पूरा करना होगा।
मेंटेनेंस की मोटी रकम के लिए बिल्डर नहीं करते हैंडओवर
यह कोई पहला मामला नहीं है। रेरा को लगातार इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी बिल्डर उसे वहां रहने वाले लोगों की समिति को हैंडओवर नहीं करते। वे बार-बार वहां अपना ही अधिकार जताते हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण मेंटेनेंस के लिए मिलने वाली हर माह की बड़ी रकम होती है, जिसे बिल्डर खुद रख लेते हैं। कई बार तो इस रकम का उपयोग दूसरे प्रोजेक्ट्स में भी कर दिया जाता है।
यही वजह है कि केवल इसी नियम की अनदेखी करने के मामले में रेरा ने अब तक करीब 900 बिल्डरों को नोटिस थमा दिया है। इन सभी को तत्काल कॉलोनी वहां के लोगों को सौंपने के लिए कहा गया है। रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कॉलोनी का अधिकार वहीं के लोगों को मिलने के बाद रखरखाव और संचालन ज्यादा बेहतर तरीके से होता है। लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से नियम लागू कर सकते हैं। रेरा के इस सख्त फैसले से कॉलोनी और अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और अन्य बिल्डरों को कड़ा संदेश जाएगा।
