नकटी में बुलडोजर का कहर: 80 घर ढहे, बेघर परिवारों की पहली रात मलबे और खुले आसमान के बीच गुजरी
रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे नकटी गांव में सोमवार को अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई के दौरान करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कुछ ही घंटों में वे घर मलबे में बदल गए, जिनमें वर्षों से परिवार रह रहे थे और जिनसे उनकी अनगिनत यादें जुड़ी थीं। कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए घरों के सामने सामान समेटते और भविष्य की चिंता में डूबे दिखाई दिए। कई महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने रात खुले आसमान के नीचे बिताई।
गांव को बनाया गया सुरक्षा छावनी
कार्रवाई से पहले पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। ग्रामीणों के अनुसार गांव की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। गांव से करीब तीन किलोमीटर पहले ही पुलिस का सुरक्षा घेरा बना दिया गया था। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
बुलडोजर के सामने खड़े हुए ग्रामीण, फिर शुरू हुई कार्रवाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह होते ही बुलडोजर ने चिन्हित मकानों को हटाना शुरू किया। इस दौरान कई ग्रामीण अपने घरों के सामने खड़े होकर कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। पुलिस ने उन्हें हटाकर प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाई। इसी दौरान कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
पुलिस पर हुआ पथराव, सुरक्षा बल अलर्ट रहे
कार्रवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब कुछ ग्रामीणों का आक्रोश पथराव में बदल गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर की मदद से खुद का बचाव किया। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संयम बरता गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर पूरा ध्यान दिया गया।
नगर निगम ने कराया सामान शिफ्ट
मौके पर नगर निगम के मालवाहक वाहन भी तैनात किए गए थे। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों का घरेलू सामान नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (EWS) आवासों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। कई घरों में बंधे मवेशियों को भी पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों ने सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी जगह पहुंचाया।
ग्रामीण बोले- 'चार महीने का भरोसा मिला, चार दिन भी इंतजार नहीं हुआ'
प्रभावित ग्रामीणों ने दावा किया कि कुछ दिन पहले वे रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उनके अनुसार सांसद ने आश्वासन दिया था कि बरसात के दौरान तोड़फोड़ नहीं होगी और समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। कार्रवाई के बाद कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें दिए गए आश्वासन पर अमल नहीं हुआ।
'एक फ्लैट पूरे परिवार के लिए पर्याप्त नहीं'
कई प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बड़े संयुक्त परिवारों को एक छोटा फ्लैट आवंटित किया जा रहा है, जिसमें सभी सदस्यों का रहना व्यावहारिक नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार के आकार के अनुरूप पुनर्वास की मांग की।
'सूची में नाम नहीं था, फिर भी मकान गिरा दिया'
कार्रवाई के दौरान टिकेश्वरी नाम की एक युवती ने आरोप लगाया कि उसका मकान प्रशासन की सूची में शामिल नहीं था, फिर भी उसे तोड़ दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन ने उन्हें पुनर्वास का आश्वासन दिया है। इस संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
विरोध करने वालों को हिरासत में लिया गया
कार्रवाई के दौरान विरोध कर रहे कुछ ग्रामीणों को पुलिस ने मौके से हटाकर अस्थायी रूप से हिरासत में लिया। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। बाद में पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया।
अधिकारियों ने कहा- 'कानून के तहत हुई कार्रवाई
कार्रवाई समाप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों का कहना था कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है और उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास जारी रहेगा।
'आज रात कहां जाएंगे?' मलबे के बीच बैठा रहा पूरा गांव
शाम ढलने के बाद भी कई परिवार अपने टूटे हुए घरों के पास ही बैठे रहे। जब उनसे पूछा गया कि रात कहां बिताएंगे, तो कई लोगों का जवाब था- "यहीं रहेंगे, अभी सामान समेटना बाकी है।" उजड़े आशियानों के बीच बैठे परिवारों की यह तस्वीर पूरे घटनाक्रम का सबसे मार्मिक दृश्य बन गई।
