कांकेर में धान खरीदी में 1.44 करोड़ की कथित गड़बड़ी, दो कर्मचारी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। अंतागढ़ क्षेत्र के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आसुलखार के धान खरीदी केंद्र में जांच के दौरान 4,651.20 क्विंटल धान का अंतर पाया गया है। इसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ 44 लाख 18 हजार 720 रुपये बताई गई है। मामले में धान खरीदी केंद्र प्रभारी टिकेश्वर पोटाई और बारदाना प्रभारी भोज कुमार जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
कांकेर धान खरीदी केंद्र में कैसे सामने आई गड़बड़ी?
जानकारी के अनुसार, मामला खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 का है। आसुलखार धान खरीदी केंद्र में कुल 748 किसानों से 36,703.20 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई थी। खरीदी और भंडारण से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद कांकेर कलेक्टर कुंदन कुमार के निर्देश पर संयुक्त जांच दल गठित किया गया।
जांच दल ने खरीदी केंद्र पहुंचकर धान का भौतिक सत्यापन किया और उपलब्ध स्टॉक का दस्तावेजों में दर्ज आंकड़ों से मिलान किया। इस दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया। जांच में 11,628 बोरा धान, जिसका कुल वजन 4,651.20 क्विंटल है, से संबंधित अनियमितता पाई गई। इसकी अनुमानित कीमत 1,44,18,720 रुपये आंकी गई है।
समिति प्रबंधक की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर
जांच में अनियमितता सामने आने के बाद आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आसुलखार के प्रबंधक परमेश महावीर ने भानुप्रतापपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 1 नवंबर 2026 को धान खरीदी केंद्र प्रभारी टिकेश्वर पोटाई और बारदाना प्रभारी भोज कुमार जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। इसके बाद न्यायालय ने उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर और खरीदी संबंधी रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
748 किसानों से हुई थी 36 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी
आसुलखार धान खरीदी केंद्र में बड़ी संख्या में किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 748 किसानों से कुल 36,703.20 क्विंटल धान खरीदा गया था। ऐसे में भौतिक सत्यापन के दौरान 4,651.20 क्विंटल धान से संबंधित अंतर मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
धान खरीदी केंद्रों में खरीदी गई मात्रा, बारदाना, परिवहन और भंडारण का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर मिलने से केंद्र की निगरानी और स्टॉक प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच में सामने आएंगे गड़बड़ी के असली कारण
इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हजारों क्विंटल धान का अंतर कैसे आया और इसकी जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं मिली। क्या यह रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला है, भंडारण में लापरवाही हुई है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कथित अनियमितता में केवल नामजद कर्मचारियों की भूमिका थी या अन्य लोग भी इसमें शामिल थे। फिलहाल 1.44 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितता का यह मामला कांकेर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
महत्वपूर्ण: एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। मामले में दोष और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
