जिला अस्पताल में जन्म प्रमाण-पत्र घोटाले की आशंका: सरकारी CRS पोर्टल से कथित फर्जी दस्तावेज जारी, रिकॉर्ड में हेरफेर; पुलिस जांच शुरू
नर्मदापुरम। नर्मदापुरम जिला चिकित्सालय में जन्म प्रमाण-पत्रों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी CRS (Civil Registration System) पोर्टल का दुरुपयोग कर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया और कथित रूप से फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र जारी किए गए। मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए पुलिस जांच की मांग की है। जिला चिकित्सालय के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार एवं चिकित्सक डॉ. अखिलेश सिंघल ने जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय को लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रजिस्ट्रार की पोर्टल आईडी के दुरुपयोग का आरोप
डॉ. सिंघल के अनुसार, हाल ही में दो ऐसे मामले सामने आए जिनमें सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल पोर्टल के बीच गंभीर विसंगतियां मिलीं है। पहले मामले में आरोप है कि जिला चिकित्सालय के CRS पोर्टल पर रजिस्ट्रार की आईडी का कथित दुरुपयोग कर एक बच्चे के माता-पिता के नाम और पते में बदलाव कर दिया गया है। सबसे गंभीर बात यह रही कि अस्पताल के मूल जन्म रजिस्टर, जन्म-मृत्यु अभिलेख और डिलीवरी रिकॉर्ड में इस तरह के किसी संशोधन का उल्लेख नहीं मिला। न तो कोई आवेदन प्रस्तुत किया गया और न ही नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई, इसके बावजूद संशोधित जन्म प्रमाण-पत्र डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी हो गया। दूसरे मामले में जुड़वा बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्रों में भी कथित रूप से इसी तरह की गड़बड़ी और रिकॉर्ड में हेरफेर पाए जाने की शिकायत दर्ज कराई गई है।
फर्जी सील और जाली हस्ताक्षरों का भी आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों पर लगी डिस्पैच सील अस्पताल की आधिकारिक सील से मेल नहीं खाती। इसके अलावा कार्यालय प्रभारी के हस्ताक्षरों के भी कथित रूप से जाली होने की आशंका जताई गई है। इन तथ्यों के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने आशंका व्यक्त की है कि सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने वाला कोई संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
सिविल सर्जन ने पुलिस जांच की मांग की
जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले ने बताया कि मामला सामने आते ही अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को लिखित सूचना देकर एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत जांच का अनुरोध किया है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय को भी भेज दी गई है। फिलहाल, पुलिस और संबंधित तकनीकी विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि सरकारी पोर्टल तक पहुंच कैसे बनी, रिकॉर्ड में कथित बदलाव किसने किए और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के पीछे कौन लोग शामिल हैं। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
