Saudi Arabia: मक्का के आसमान में ड्रोन से मचा हड़कंप! सऊदी एयर डिफेंस ने किया इंटरसेप्ट, हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से किया इनकार

Saudi Arabia: मक्का के आसमान में ड्रोन से मचा हड़कंप! सऊदी एयर डिफेंस ने किया इंटरसेप्ट, हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से किया इनकार

Saudi Arabia News: सऊदी अरब और यमन के हूती आंदोलन के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच मंगलवार, 15 सितंबर की शाम मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट किए जाने की घटना सामने आई है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे की गई।

सऊदी अधिकारियों ने ड्रोन को हूती आंदोलन से जुड़ा बताया है और इसे मक्का को निशाना बनाने की कथित कोशिश करार दिया है। हालांकि, हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है। ऐसे में फिलहाल ड्रोन का वास्तविक लक्ष्य क्या था और इसे किस दिशा में भेजा गया था, इस पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

मक्का के दक्षिण में इंटरसेप्ट हुआ ड्रोन
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्सेज ने मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे ड्रोन को मक्का के दक्षिण में इंटरसेप्ट किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन को पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ड्रोन का मलबा शहर के दक्षिणी हिस्से में गिरा। इस घटना के बाद मक्का सहित आसपास के इलाकों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, 15 सितंबर को मक्का, जेद्दा और ताइफ में कुछ समय के लिए खतरे संबंधी अलर्ट भी जारी किए गए थे। बाद में इन अलर्ट को हटा लिया गया।

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‘दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा रेड लाइन’
ड्रोन घटना के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दो पवित्र मस्जिदों मक्का की मस्जिद अल-हरम और मदीना की मस्जिद-ए-नबवी की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया है। प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा ‘रेड लाइन’ है। उन्होंने संकेत दिया कि संयुक्त बल कमान भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक और निवारक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। मक्का मुस्लिमों के लिए सबसे पवित्र शहर है और यहां स्थित ग्रैंड मस्जिद में काबा है। ऐसे में शहर के आसपास किसी भी संभावित हवाई खतरे को सऊदी सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है।

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2017 की मिसाइल घटना का भी दिया हवाला
सऊदी गठबंधन ने इस घटना को मक्का की ओर कथित तौर पर किए गए दूसरे प्रयास के रूप में पेश किया है। अल-मलिकी ने 27 जुलाई 2017 को मक्का की दिशा में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल का भी उल्लेख किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि मौजूदा ड्रोन घटना उसी तरह की सुरक्षा चुनौती का हिस्सा है। हालांकि, इस बार हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी आरोप को खारिज किया है। इसलिए घटना की रिपोर्टिंग में सऊदी दावे और हूती पक्ष के इनकार को अलग-अलग रखना महत्वपूर्ण है। ड्रोन का उद्देश्य क्या था, इस बारे में स्वतंत्र रूप से पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

हूतियों और सऊदी अरब के बीच क्यों बढ़ रहा तनाव?
मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट होने की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब यमन में हूती आंदोलन और सऊदी समर्थित ताकतों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब के अलग-अलग इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया है कि 14 सितंबर के हमलों में खामिस मुशैत, अबहा और ताइफ में 13 नागरिक घायल हुए तथा कुछ घरों और वाहनों को नुकसान पहुंचा। दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। हूती पक्ष ने यमन में सऊदी समर्थित बलों की सैन्य गतिविधियों और हवाई हमलों का भी आरोप लगाया है। इन दावों में से कई की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

यमन में फिर तेज हुई लड़ाई
यमन में लंबे समय तक अपेक्षाकृत कम तीव्रता के बाद संघर्ष एक बार फिर तेज हुआ है। हूतियों ने 2014 में राजधानी सना समेत बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित किया था, जिसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप में शामिल हुआ। 2022 में संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्षविराम के बाद हिंसा में कुछ कमी आई थी, लेकिन हालिया घटनाक्रमों के बीच यमन में सैन्य टकराव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

बाब-अल-मंदेब पर भी बढ़ी चिंता
यमन में बढ़ती सैन्य गतिविधियों का असर केवल सऊदी अरब की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी है। बाब-अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक जहाजों तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग रणनीतिक महत्व रखता है। यमन में संघर्ष बढ़ने पर इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ सकती है। हाल की रिपोर्टों में हूती गतिविधियों और बाब-अल-मंदेब के आसपास सैन्य नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई गई है। इससे वैश्विक शिपिंग, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय व्यापार पर संभावित असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

क्या मक्का को वास्तव में निशाना बनाया गया था?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है। सऊदी अरब का कहना है कि हूती ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था, जिसे शहर में प्रवेश से पहले ही नष्ट कर दिया गया। दूसरी ओर, हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है। इसलिए अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि ड्रोन का अंतिम लक्ष्य वास्तव में मक्का ही था। घटना की स्वतंत्र पुष्टि, ड्रोन के उड़ान मार्ग और उसके संभावित लॉन्च प्वाइंट से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।

आगे क्या होगा?
मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट होने की घटना ऐसे समय हुई है जब सऊदी अरब और हूती आंदोलन के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जबकि हूती पक्ष ने सऊदी आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।

अब नजर इस बात पर होगी कि सऊदी अरब इस घटना के बाद क्या सैन्य कदम उठाता है और क्या यमन में संघर्ष का दायरा और बढ़ता है। साथ ही, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में किसी नई सैन्य गतिविधि का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, इतना स्पष्ट है कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही इंटरसेप्ट कर दिया गया था और सऊदी अधिकारियों के मुताबिक पवित्र शहर या ग्रैंड मस्जिद को कोई नुकसान नहीं हुआ।

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