फर्जी बिलिंग से करोड़ों के लेन-देन तक! खैर लकड़ी तस्करी नेटवर्क पर महासमुंद पुलिस का शिकंजा, ₹1.70 करोड़ जब्त
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की कथित अवैध तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कारोबार चलाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई का दायरा दूसरे राज्यों तक बढ़ा दिया है। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को गिरफ्तार किया है। आरोपी के ठिकाने से 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
इस प्रकरण में अब तक विभिन्न राज्यों में कार्रवाई के दौरान लगभग 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है। पुलिस की जांच में कथित तौर पर फर्जी बिलिंग, ट्रांजिट पास और एनओसी के इस्तेमाल के साथ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की परतें सामने आई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और कथित अवैध कारोबार से हासिल रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
हिमाचल प्रदेश तक पहुंची जांच, ठिकानों पर दबिश
महासमुंद पुलिस की विशेष टीम ने हिमाचल प्रदेश में कार्रवाई करते हुए सतपाल सिंह को 12 अक्टूबर 2026 को सिरमौर जिले के कालाअंब से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी शिव ट्रेडर्स फर्म का संचालक है और कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सिरमौर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर उसे महासमुंद लाया गया। अब उसे न्यायिक रिमांड के लिए संबंधित न्यायालय में पेश किए जाने की प्रक्रिया बताई गई है। इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कथित अवैध कारोबार से जुड़े ठिकाने से 1.70 करोड़ रुपये नकद जब्त किए। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार स्थित मकान पर दबिश देकर 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे।
हरियाणा के गोदाम से 15 टन खैर लकड़ी बरामद
इस मामले में पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले की पटौदी तहसील के ग्राम बहोड़ा कलां स्थित श्री बालाजी ट्रेडिंग फर्म के गोदाम की तलाशी ली थी। पुलिस के मुताबिक, मनीष अग्रवाल से संबंधित बताई जा रही इस फर्म के गोदाम से करीब 15 टन खैर लकड़ी बरामद की गई। पुलिस का कहना है कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक लगभग 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की गई है। अलग-अलग स्थानों पर मिली लकड़ी और दस्तावेजों के आधार पर कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
फर्जी बिलिंग और ट्रांजिट पास के इस्तेमाल का आरोप
पुलिस की विवेचना के अनुसार, सतपाल सिंह ने अपनी फर्म शिव ट्रेडर्स के माध्यम से अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कथित आपराधिक षड्यंत्र किया। आरोप है कि वास्तविक खैर लकड़ी की आपूर्ति किए बिना अलग-अलग फर्मों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए। इन दस्तावेजों को वैध दिखाने के लिए वन विभाग के फर्जी ट्रांजिट पास तैयार करने और एचएसएन कोड के दुरुपयोग की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के बैंकिंग लेन-देन की जांच में कई बार करोड़ों रुपये के भुगतान किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, इन लेन-देन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और रकम के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
फर्जी एनओसी से शुरू हुई थी जांच
इस प्रकरण में कार्रवाई की शुरुआत वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। इसके आधार पर थाना पिथौरा में 9 जुलाई 2026 को मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय वन अधिनियम, 1927 और मामले में उल्लिखित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए लकड़ी के परिवहन और कारोबार को किस तरह वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं आरोपी
पुलिस इस मामले में पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार, पारितोष मिश्रा पीयूष इंटरप्राइजेस और अखिलेश सिंघल सिंघल इंटरप्राइजेस से जुड़े बताए गए हैं। अब जांच का दायरा कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क, बैंक खातों में हुए लेन-देन, अन्य संदिग्ध कारोबारियों और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों तक बढ़ाया गया है।
पुलिस ने यह भी बताया है कि अपराध से अर्जित रकम की कुर्की और आरोपियों को अवैध आर्थिक लाभ से वंचित करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोपों और वित्तीय लेन-देन की अंतिम स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
