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बाबा बागेश्वर की कोरबा कथा में बवाल रायपुर के बसंत अग्रवाल पर हाईजैक और वसूली का आरोप आयोजकों से धक्कामुक्की
रायपुर। कोरबा जिले के बांकीमोगरा थाना क्षेत्र के ग्राम ढपढप में चल रही पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्री हनुमंत कथा भारी विवादों में घिर गई है। आस्था और भक्ति के इस बड़े आयोजन को हाईजैक करने की खुली कोशिश की जा रही है। आयोजन समिति और बाबा को छत्तीसगढ़ लाने वाले फ्रेंचाइजी ठेकेदारों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि रविवार और सोमवार की रात लगातार धक्कामुक्की और विवाद की नौबत आ गई। मुख्य आरोप रायपुर और आसपास के इलाकों में जमीन के कारोबार से जुड़े बसंत अग्रवाल पर लग रहे हैं। आरोप है कि बसंत अग्रवाल कथा के मुख्य आयोजकों को किनारे कर अपना रौब दिखा रहे हैं और बाबा से मिलाने के नाम पर मोटी रकम की वसूली कर रहे हैं।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के लिए कोरबा का अपना घर सेवा आश्रम लंबे समय से पसीना बहा रहा था। लेकिन कथा शुरू होने के दो दिन पहले से ही बसंत अग्रवाल ने पूरे कार्यक्रम पर कब्जा जमाने का खेल शुरू कर दिया। आयोजकों का आरोप है कि बसंत अग्रवाल ने बिना किसी अधिकार के मुख्य द्वार और वीआईपी व्यवस्था को अपने हाथ में ले लिया है। वह आयोजकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बदसलूकी कर रहे हैं।
रविवार की रात अग्रसेन भवन में इसी बात को लेकर बसंत अग्रवाल और कार्यक्रम के संयोजक अमरजीत सिंह के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच बचाव कर मामला शांत कराया। लेकिन बसंत अग्रवाल की मनमानी यहीं नहीं रुकी। सोमवार की रात अग्रसेन भवन के मुख्य द्वार पर फिर से बड़ा बवाल हो गया।
आयोजक टीम का एक प्रमुख कार्यकर्ता अपने प्रमुख के निर्देश पर दरवाजे पर ड्यूटी दे रहा था। तभी बसंत अग्रवाल वहां पहुंचे और उस कार्यकर्ता पर धौंस जमाने लगे। उन्होंने कार्यकर्ता से बदतमीजी करते हुए उसे वहां से हटने और इधर उधर जाने का आदेश देना शुरू कर दिया। लेकिन स्थानीय कार्यकर्ता भी निडर था और उसने बसंत अग्रवाल को वहीं करारा जवाब दिया। दोनों के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बात इतनी बिगड़ गई थी कि बसंत अग्रवाल वहां पिटते पिटते बचे। स्थानीय कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
इस पूरी घटना के बाद पीड़ित कार्यकर्ता ने सीधे पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास जाकर बसंत अग्रवाल की शिकायत की। उसने बाबा को बताया कि किस तरह उनके करीबी होने का फायदा उठाकर बसंत अग्रवाल स्थानीय आयोजकों को बेइज्जत कर रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि बाबा की तरफ से कार्यकर्ता को कोई साफ जवाब या राहत नहीं मिली। इससे स्थानीय आयोजकों में और ज्यादा निराशा और गुस्सा भर गया है।
कथा के दौरान मौसम ने भी अपना खलल डाला। सोमवार को तेज आंधी और तूफान के कारण कथा को करीब डेढ़ घंटे पहले ही खत्म करना पड़ा। इसके बाद देर रात अग्रसेन भवन में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दिव्य दरबार लगाया और लोगों की समस्याएं सुनीं। आज मंगलवार दोपहर एक बजे से कथा स्थल पर फिर से दिव्य दरबार लगने जा रहा है।
कोरबा के लोगों और आयोजकों का सीधा आरोप है कि बसंत अग्रवाल बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तरह व्यवहार कर रहे हैं। जिन लोगों ने दिन रात एक कर इस कथा का आयोजन किया उन्हें पीछे धकेला जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि आम श्रद्धालुओं को बाबा से मिलने से रोका जा रहा है जबकि बसंत अग्रवाल अपने चहेते लोगों को वीआईपी रास्ते से मिलवा रहे हैं। चर्चा है कि इस मिलाई के एवज में वह लोगों से अच्छी खासी रकम वसूल रहे हैं। उनकी इस अवसरवादिता के कारण आयोजन की मूल भावना को गहरी ठेस पहुंची है।
अपना घर सेवा आश्रम ने इस आयोजन के जरिए कोरबा में भक्ति और स्नेह का माहौल बनाने की कोशिश की थी। लेकिन बसंत अग्रवाल की दखलंदाजी ने आपसी तालमेल को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अब आयोजन स्थल पर तनाव का माहौल है। शहर में हर तरफ यही चर्चा है कि क्या पंडित धीरेंद्र शास्त्री की टीम ने बसंत अग्रवाल को इतनी छूट दे रखी है कि वह अपनी मनमानी कर बाबा की छवि खराब करें। कोरबा में जो कुछ हो रहा है वह बाबा के प्रबंधन पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
