नकली पुलिस, असली गठजोड़: पुलिस अफसरों से सेटिंग कर केस निपटाता था फर्जी इंस्पेक्टर
रायपुर। राजधानी रायपुर में फर्जी पुलिस बनकर केस सेटलमेंट का नेटवर्क चलाने वाले आशीष घोष की गिरफ्तारी ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। बुधवार को पकड़े गए आशीष को जब कोर्ट में पेश किया गया, तो उसके पास से बरामद सामान ने अफसरों की आंखें खोल दीं। दो लाख रुपये नकद, सोने की दो अंगूठियां, दो ब्रेसलेट और अन्य कीमती सामान जब्त किया गया, जिसका वह कोई ठोस हिसाब नहीं दे सका।
सबसे चौंकाने वाली बात उसके मोबाइल से मिले चैट्स हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों को महंगे मोबाइल, बाइक और ब्रांडेड जूतों के गिफ्ट देने की बातें सामने आई हैं। ये चैट न केवल उसकी पहुंच और हिम्मत को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि आशीष किसी मजबूत 'सिस्टम सेटिंग' के सहारे फर्जीवाड़ा कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब जांच की दिशा उन 'असली वर्दीवालों' की ओर भी मुड़ती दिख रही है, जिनके नाम इन चैट्स में दर्ज हैं।
पुलिस को आशीष की गाड़ी से एक थाने का सील-मोहर, ड्यूटी चार्ट और गश्त पॉइंट भी मिला है। उसके मोबाइल में कई इंस्पेक्टर और डीएसपी रैंक के अधिकारियों के साथ पार्टी करते हुए तस्वीरें और केस सेटलमेंट से जुड़े चैट भी मिले है। कई चैट डिलीट होने के कारण मोबाइल को साइबर लैब भेजा गया है, ताकि डेटा रिकवर किया जा सके. प्रारंभिक जांच में पता चला कि आशीष प्रदेश के कई थानों में नियमित रूप से आता-जाता था. वह थानों में दर्ज मामलों की जानकारी लेता और फिर शिकायतकर्ताओं को बाहर बुलाकर पैसे लेकर केस सेटलमेंट करता था. उसने पुलिस अधिकारियों के साथ अपनी नजदीकियां बनाकर इस धंधे को अंजाम दिया.
आशीष ने पूछताछ में बताया कि उसकी मुलाकात एसीबी-ईओडब्ल्यू में तैनात सिपाही उमेश कुर्रे से हुई थी। आशीष ने उमेश के पुलिस आईडी कार्ड की तस्वीर चुपके से खींची, उसमें फोटोशॉप के ज़रिए अपनी तस्वीर लगाई और तैयार करवा ली एक दमदार नकली पहचान, फर्जी पुलिस आईडी, जिस पर डीजी जीपी सिंह के जाली हस्ताक्षर तक मौजूद थे। इस हाई-टेक फर्जीवाड़े में उसे मदद मिली घड़ी चौक स्थित वीर नारायण परिसर के एक दुकानदार से, जिसने डिजिटल उपकरणों और प्रिंटिंग के जरिए उसे हूबहू असली जैसी आईडी तैयार कर दी।
