16 साल से सेवा पुस्तिका नहीं जांची, रिटायरमेंट होते ही दफ्तरों के चक्कर काट रहे शिक्षक
रायपुर। शिक्षा विभाग में शिक्षकों की सेवा पुस्तिका हर साल जांचने का नियम कागजों में ही सिमट कर रह गया है। 2010 के बाद से ज्यादातर जिलों में इसका नियमित परीक्षण ही नहीं कराया गया। नतीजा यह है कि हजारों शिक्षकों की 10 से 15 साल की नौकरी का रिकॉर्ड न तो जांचा गया और न ही समय पर अपडेट हुआ। अब इसका पूरा खामियाजा शिक्षकों को रिटायरमेंट के वक्त भुगतना पड़ रहा है।
नियम के मुताबिक सेवा पुस्तिका में शिक्षक की नौकरी की पूरी हिस्ट्री दर्ज रहती है। इसमें हर साल यह देखना जरूरी होता है कि शिक्षक ने कितनी छुट्टियां लीं, कितना अर्जित अवकाश बचा है, वेतन निर्धारण सही तरीके से हुआ है या नहीं और सेवा से जुड़ा कोई हिसाब-किताब अधूरा तो नहीं है। इस जांच के बाद रिकॉर्ड को अपडेट कर सत्यापित करना होता है। यह पूरी जिम्मेदारी प्राचार्य और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की होती है। लेकिन सालों से इस जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे पुराना रिकॉर्ड जस का तस अटका पड़ा है।
पुरानी पोस्टिंग वाले स्कूलों की दौड़ लगा रहे शिक्षक
जिन शिक्षकों की सेवा पुस्तिका में पुरानी पोस्टिंग का रिकॉर्ड अधूरा है, उन्हें अब अपने पुराने स्कूलों और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसी शिक्षक ने अपनी नौकरी के दौरान जितने स्कूल बदले, रिकॉर्ड पूरा न होने पर उसे उतनी ही जगहों पर जाकर पुराने कागज जुटाने पड़ रहे हैं। छुट्टी, पदस्थापना और वेतन निर्धारण की एंट्री कराने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षक परेशान हो रहे हैं। यही अधूरा रिकॉर्ड पेंशन की राह में सबसे बड़ी रुकावट बन रहा है। जब तक सेवा की पूरी अवधि सत्यापित नहीं होती, तब तक पेंशन और बाकी देयकों की गणना आगे नहीं बढ़ पाती।
इन कारणों से अटक रहा पेंशन का काम:
•अर्जित अवकाश का हिसाब अधूरा: सेवा पुस्तिका में अर्जित अवकाश की सही एंट्री न होने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लाभ का हिसाब अटक जाता है।
•पीपीओ नंबर मिलने में देरी: रिटायरमेंट के बाद पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी करने में ढिलाई होती है, जिससे पेंशन शुरू होने में महीनों लग जाते हैं।
•अधूरे दस्तावेज: नियुक्ति, पदोन्नति, वेतन निर्धारण और छुट्टी से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे न होने के कारण शिक्षकों को पुराने दफ्तरों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
